5 नवंबर को सुबह 11 बजे दिल्ली के आधिकारिक डैशबोर्ड पर पूरी राजधानी की हवा 'खराब' (Poor) श्रेणी में दर्ज की गई, जिसमें सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों का AQI 260 के करीब पहुंच गया। वहीं ग्लोबल ट्रैकिंग ऐप्स ने दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 के पार दर्ज किया, जो सेहत के लिए 'बेहद खतरनाक' स्थिति है।
रोजाना कार से सफर करने वालों के लिए यह किताबी बातें करने का नहीं, बल्कि तुरंत कदम उठाने का वक्त है। तो सवाल यह उठता है कि चलती कार के अंदर हवा को साफ रखने के लिए वाकई कौन सा तरीका काम करता है? इसे आप महज 2 मिनट के एक सिंपल टेस्ट से खुद परख सकते हैं।
एक PM2. 5 मीटर लें, कार के शीशे बंद करें, एसी को 'फ्रेश एयर' और फैन को मीडियम स्पीड पर रखकर रीडिंग नोट करें। अब एसी चालू करें और मोड को 'रीसर्कुलेशन' पर सेट कर दें।
कुछ ही मिनटों में मीटर पर प्रदूषण के आंकड़े तेजी से गिरते नजर आएंगे। रिसर्च बताती है कि कार में लगे नॉर्मल फिल्टर भी PM2. 5 के स्तर को 30 से 60 फीसदी तक घटा देते हैं, जबकि हाई-एफिशिएंसी फिल्टर का असर इससे कहीं ज्यादा होता है।
दिल्ली का स्मॉग: कार प्यूरीफायर और PM2. 5 फिल्टर कितने असरदार? क्या भारी ट्रैफिक के बीच क्लिप-ऑन कार प्यूरीफायर हवा को तेजी से साफ कर पाते हैं?
दरअसल, कई आयोनाइजर और छोटे HEPA प्यूरीफायर सिर्फ 5 से 10 cfm (क्यूबिक फीट प्रति मिनट) साफ हवा ही दे पाते हैं, जो कार के अपने वेंटिलेशन के आगे बहुत कम है। इसके अलावा, पंखा बहुत तेज चलाने पर कार के इन-बिल्ट फिल्टर भी हवा को सही से साफ नहीं कर पाते, इसलिए बेहतर परफॉर्मेंस के लिए फैन स्पीड मीडियम पर ही रखें।
अगर प्यूरीफायर की क्षमता कार के केबिन साइज से मैच नहीं करेगी, तो हवा साफ होने में बहुत समय लगेगा। टेप या फोम लगाकर 'वेंट-सील' करने जैसे जुगाड़ काफी खतरनाक हो सकते हैं। इससे एयर इनलेट ब्लॉक होने, कार में पानी घुसने, डिफॉगिंग रुकने और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
कार कंपनियां भी एयर इनलेट्स को खुला रखने और लगातार रीसर्कुलेशन मोड न चलाने की सलाह देती हैं। वहीं कुछ आयोनाइजर ओजोन गैस छोड़ते हैं जो नुकसानदेह है, इसलिए हमेशा जीरो-ओजोन सर्टिफाइड डिवाइस ही चुनें। किसी भी खतरनाक जुगाड़ के बजाय एक अच्छी क्वालिटी का फिल्टर लगाएं, वент साफ रखें और जरूरत के मुताबिक ही रीसर्कुलेशन मोड का इस्तेमाल करें।
भारतीय बाजार में अब आम बजट कारों में भी PM2. 5 केबिन फिल्टर या इन-बिल्ट एयर प्यूरीफायर मिलने लगे हैं, हालांकि यह कार के मॉडल और वेरिएंट पर निर्भर करता है। हालिया ब्रोशर और कार गाइड से साफ है कि लोकप्रिय हैचबैक और एसयूवी में यह फीचर आ रहा है।
कुछ कंपनियों ने तो इसे अपने सभी वेरिएंट्स में स्टैंडर्ड कर दिया है। स्मॉग के इस मौसम में सफर पर निकलने से पहले अपनी कार का वेरिएंट और यह फीचर जरूर चेक कर लें। ।
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