आज यानी 8 नवंबर 2026 को दिवाली पर गिफ्ट्स का दौर चरम पर है। अगर आपको रिश्तेदारों के अलावा किसी और से तोहफा मिल रहा है, तो ध्यान दें कि साल भर में ₹50,000 से ज्यादा के गिफ्ट पर टैक्स लगता है। ₹50,000 की सीमा पार होते ही पूरी रकम 'Income from Other Sources' के तहत टैक्सेबल हो जाती है।
कैश गिफ्ट्स के लिए नियम और भी सख्त हैं—इनकम टैक्स के सेक्शन 269ST के तहत एक दिन में, किसी एक व्यक्ति से या किसी एक इवेंट पर ₹2,00,000 या उससे ज्यादा कैश लेना मना है। हालांकि, डिजिटल ट्रांसफर पर यह रोक लागू नहीं होती। वहीं, एम्प्लॉयर से मिलने वाले ₹5,000 तक के नॉन-कैश (गैर-नकद) गिफ्ट टैक्स-फ्री हैं, लेकिन कैश मिलने पर उसे सैलरी मानकर टैक्स लगाया जाएगा।
खास रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट्स पर पूरी तरह टैक्स छूट मिलती है। ध्यान रहे कि इनकम टैक्स कानून में दिवाली को छूट वाले मौकों की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है—पूरी तरह टैक्स फ्री गिफ्ट्स सिर्फ 'शादी के मौके' पर ही मिलते हैं। इसके अलावा, क्लबिंग (Clubbing) नियमों का भी ख्याल रखें।
अगर आप जीवनसाथी को कोई संपत्ति या एसेट गिफ्ट करते हैं, तो उससे होने वाली कमाई आपकी ही इनकम में जोड़ी जाएगी। वहीं, नाबालिग बच्चे के नाम से हुई कमाई को प्रति बच्चा ₹1,500 की मामूली राहत के साथ माता-पिता की आय में क्लब किया जाता है। बड़े मूल्य के लेनदेन या गिफ्ट्स के लिए साधारण गिफ्ट डीड या मेमो संभालकर जरूर रखें।
दिवाली गिफ्ट्स के नियम: ₹50,000 की लिमिट, कैश की सीमा और एम्प्लॉयर की ₹5,000 वाली छूटबड़े गिफ्ट्स के लेनदेन के लिए हमेशा बैंकिंग चैनलों का ही इस्तेमाल करें। UPI और अन्य डिजिटल तरीकों से पेमेंट करने पर आप सेक्शन 269ST के झंझट से बचे रहते हैं। अगर गिफ्ट में सोना, चांदी या इलेक्ट्रॉनिक्स मिला है, तो उसका सही वैल्यूएशन पक्के बिल से तय करें।
बिल न होने पर नियम 11UA के मुताबिक और तय सीमा से ज्यादा ज्वैलरी होने पर रजिस्टर्ड वैल्यूअर से मूल्यांकन कराएं। टैक्सेबल गिफ्ट्स को अपनी ITR की Schedule OS (Income from Other Sources) में दर्ज करें। सुरक्षा के लिए बिल, इनवॉइस और पेमेंट के स्क्रीनशॉट संभालकर रखें।
अगर कोई ब्रांड या डिस्ट्रीब्यूटर अपने ग्राहकों, डॉक्टरों या इन्फ्लुएंसर्स को गिफ्ट हैंपर देता है, तो उस पर TDS लागू हो सकता है। सेक्शन 194R के मुताबिक, अगर एक वित्त वर्ष में किसी व्यक्ति को दिए गए गिफ्ट्स या बेनेफिट्स की वैल्यू ₹20,000 से अधिक हो जाती है, तो गिफ्ट देने वाले को 10% की दर से TDS काटना होगा।
अगर गिफ्ट पूरी तरह से सामान या वस्तु (In Kind) के रूप में है, तो गिफ्ट देने वाले को टैक्स खुद एडजस्ट (Gross-up) करना होगा या देने से पहले रिसीवर से टैक्स जमा कराना होगा। बाद में किसी क्लेम रिजेक्शन से बचने के लिए सामान के ब्योरे और PAN कार्ड की पूरी जानकारी संभालकर रखें।
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