बुधवार, 04 नवंबर 2026 11:21 PM IST
DARSH NEWS
🌤️ 18°C
टेक्नोलॉजी अखिल भारतीय 16,330 व्यूज

बारिश में भीगने या पानी में गिरने पर खराब नहीं होगा स्मार्टफोन, क्या है IP रेटिंग का असली मतलब?

DARSH NEWS डेस्क • 04 Nov 2026, 02:48 PM IST
बारिश में भीगने या पानी में गिरने पर खराब नहीं होगा स्मार्टफोन, क्या है IP रेटिंग का असली मतलब?

स्मार्टफोन की वाटर रेजिस्टेंस और IP रेटिंग: पानी से बचाव के लिए क्या जानना जरूरी है? IP रेटिंग्स फोन की पानी और धूल से सुरक्षा का स्तर दर्शाती हैं। ये रेटिंग्स नियंत्रित लैब टेस्टिंग पर आधारित होती हैं, वास्तविक उपयोग अलग।

फोन पानी में गिरे तो तुरंत निकालें, स्विच ऑफ करें और सुखाएं। ब्रह्मानंद मिश्र, नई दिल्ली। आपने नया आइफोन या कोई फ्लैगशिप एंड्रॉयड फोन खरीदा।

कुछ ही दिनों बाद इस पर पानी या कोल्ड ड्रिंक गिर गया। आपने इसे टिश्यू से सुखा दिया और बेफिक्र हो गए। सोचिए, अगर पानी गिरने से फोन खराब हो जाता, तो अनजाने में हुई एक छोटी सी गलती के चलते आपको नया फोन खरीदना पड़ता या उसकी महंगी रिपेयरिंग करानी पड़ती।

सबसे अच्छी बात यही है कि 2026 में मिलने वाले ज्यादातर प्रीमियम फोन इतने वाटर-रेजिस्टेंट होते हैं कि अगर वे पानी की बाल्टी में गिर जाएं या तेज बारिश में भीग जाएं, तो भी सुरक्षित रह सकते हैं। अगर आपने हाल ही में कोई फोन खरीदा है या नया फोन खरीदने जा रहे हैं, तो 'वाटर रेजिस्टेंट' या IP रेटिंग जैसे शब्दों को जरूर सुना होगा।

फोन पर अक्सर IP67, IP68 और IPएक्स8 जैसी रेटिंग्स दिख जाती है, लेकिन इनका असल में क्या मतलब है। क्या बेहतर IP रेटिंग वाले फोन के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना सही है? क्या इस फीचर को ज्यादा अहमियत देनी चाहिए?

इसके लिए फायदों और इसकी सीमाओं को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। नया महंगा फोन वास्तव में कितना वाटरप्रूफ है, इससे पहले हमें समझना होगा कि सभी फोन पूरी तरह से पानी में डूबने पर सुरक्षित नहीं रह सकते। कुछ को तो बिल्कुल भी पानी या किसी तरल पदार्थ के पास नहीं ले जाना चाहिए।

भले ही फोन को पानी में डुबोने के बाद भी खराब न होने का दावा किया जाए, फिर भी आपको उसे पानी से बचाना चाहिए। आइफोन 18 प्रो के लिए छह मीटर तक वाटर-रेसिस्टेंस (पानी से बचाव) का दावा किया जाता है। इससे भले ही आपको लगे कि इसे स्विमिंग शॉर्ट्स में रखकर पूल में ले जा सकते हैं, लेकिन ऐसा करना आपके लिए मुसीबत बन सकता है।

दरअसल, IP रेटिंग की टेस्टिंग नियंत्रित प्रयोगशाला (लैब) में होती है, जहां पानी स्थिर होता है। पानी के अंदर फोन के हिलने-डुलने से उसके अंदर पानी जाने और नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है। संभव है कि जिसे ठीक भी न किया जा सके।

दूसरा, IP टेस्टिंग ताजे पानी में होती है, जबकि पूल में क्लोरीन जैसे केमिकल भी हो सकते हैं। इससे फोन खराब हो सकता है। पानी में खारापन होने से चार्जिंग पोर्ट का मेटल वाला हिस्सा पूरी तरह खराब हो सकता है।

समय के साथ फोन के पोर्ट और बटन खराब होने लगते हैं, जिस पर पानी जाने नुकसान हो सकता है। ।

समाचार स्रोत: DARSH NEWS

पाठक प्रतिक्रियाएं

इस श्रेणी की अन्य ख़बरें

टेक्नोलॉजी • अखिल भारतीय

8000mAh की बैटरी और 10x ऑप्टिकल जूम वाले कैमरे के साथ आ सकता है Oppo का ये नया फोन

टेक्नोलॉजी • अखिल भारतीय

नया AC खरीदने पर मिल रहा खास एक्सचेंज ऑफर, पुराने टीवी, फ्रिज और कूलर के बदले मिलेगा पैसा

टेक्नोलॉजी • अखिल भारतीय

YouTube का नया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म! नए 'Tamba' एप की डिटेल आई सामने, Android और iOS पर हो सकता है लॉन्च

टेक्नोलॉजी • अखिल भारतीय

11,000 mAh बैटरी वाला Redmi का नया 5G फोन, करीब 7 इंच की डिस्प्ले और MediaTek प्रोसेसर

टेक्नोलॉजी • अखिल भारतीय

₹29,000 तक की छूट! Google Store पर दिवाली सेल में सस्ता हुआ Pixel 11 Pro, चेक करें डील

टेक्नोलॉजी • अखिल भारतीय

iOS 27.3 का पहला बीटा अपडेट जारी, Siri AI से लेकर Health App तक मिलेंगे कई शानदार फीचर्स

टेक्नोलॉजी • अखिल भारतीय

दिवाली धमाका ऑफर: 200Mbps ब्रॉडबैंड प्लान पर 3 महीने फ्री इंटरनेट, 30 नवंबर तक मौका

होम
राजनीति
खेल
सिनेमा
वायरल