इस बार दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग का आयोजन रविवार, 8 नवंबर 2026 को तय किया गया है। इक्विटी सेगमेंट में ट्रेडिंग दोपहर 2:20 से 3:30 बजे तक होगी, जबकि प्री-ओपन सेशन दोपहर 2:05 बजे शुरू हो जाएगा। डेरिवेटिव्स मार्केट में कारोबार शाम लगभग 3:40 बजे तक चलेगा, जिसके बाद क्लोजिंग ऑक्शन आयोजित होगा।
कैश-मार्केट के सौदे T+1 नियम के तहत प्रोसेस होंगे, यानी शेयरों की डिलीवरी सोमवार, 9 नवंबर को मिलेगी। वैकल्पिक T+0 सेटलमेंट की सुविधा केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगी जिन्होंने इसके लिए स्पष्ट रूप से विकल्प चुना है और यह कुछ चुनिंदा ISINs पर ही लागू होगा। लम्प-सम (एकमुश्त), सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP)—तीनों ही निवेश माध्यम अलग-अलग रिस्क लेने की क्षमता और समय अवधि के हिसाब से काम करते हैं।
अगर आपका विजन कई सालों का है और मार्केट पर भरोसा मजबूत है, तो लम्प-सम निवेश सही रहता है। SIP बाजार के उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करता है, जबकि ओवरनाइट फंड से किया गया एक छोटा STP कुछ हफ्तों के दौरान पैसे को चरणबद्ध तरीके से लगाने में मदद करता है। रविवार को intraday पोजीशन्स सामान्य दिनों की तुलना में जल्दी स्क्वायर-ऑफ कर दी जाएंगी, और मुख्य ट्रेडिंग सेशन से पहले आफ्टर मार्केट ऑर्डर (AMO) स्वीकार किए जाएंगे।
दिवाली मुहूर्त 2026: लम्प-सम इक्विटी, SIP या गोल्ड। कहां लगाएं पैसा? गोल्ड (सोना) इक्विटी के जोखिम को डाइवर्सिफाई करने का बेहतरीन जरिया है, लेकिन आप किस विकल्प के जरिए सोने में निवेश कर रहे हैं, उसी से तय होगा कि आपको कितना रिटर्न मिलेगा।
फिजिकल ज्वेलरी और सिक्कों की खरीदारी पर 3 फीसदी GST के साथ मेकिंग चार्ज देना पड़ता है और इन्हें दोबारा बेचते समय कम कीमत मिलती है। इसके विपरीत, एक्सचेंज ट्रैडेड फंड्स (Gold ETFs) कम लागत में ट्रेडिंग के दौरान बेहतर लिक्विडिटी देते हैं। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर 2.
5 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है जिस पर टैक्स स्लैब कर लगता है। ध्यान रखें कि 1 अप्रैल 2026 से रिडेम्प्शन पर मिलने वाली टैक्स छूट केवल ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स तक ही सीमित रहेगी; बाकी निवेशकों को 12. 5 फीसदी की दर से लॉन्ग-टर्म टैक्स देना होगा।
त्योहारों के दौरान पास में मौजूद अतिरिक्त कैश को कम समय के लिए सुरक्षित और अनुमानित रिटर्न देने वाली जगह पर पार्क करना चाहिए। पिछले 1 साल के कैटेगरी डेटा के मुताबिक ओवरनाइट फंड्स करीब 5. 7–6.
0 फीसदी का रिटर्न दे रहे हैं, जबकि लिक्विड फंड्स 6. 3–6. 6 फीसदी के आसपास बने हुए हैं।
बड़े बैंकों में सामान्य ग्राहकों के लिए 1 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर अभी करीब 6. 25 फीसदी ब्याज मिल रहा है। कोई भी विकल्प चुनने से पहले ब्याज दर, लिक्विडिटी, पेनल्टी नियमों और टैक्स कटने के बाद मिलने वाले असल रिटर्न की तुलना जरूर कर लें।
टैक्स के नए नियम अब इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट चुनने में अहम भूमिका निभाते हैं। 23 जुलाई 2024 के बाद इक्विटी से मिलने वाले शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स पर 20 फीसदी टैक्स लगता है, जबकि ₹1. 25 लाख से अधिक के लॉन्ग-टर्म गेन्स पर 12.
5 फीसदी टैक्स देय है। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए डेट म्यूचुअल फंड्स से होने वाली कमाई पर हमेशा आपकी टैक्स स्लैब ही टैक्स लगेगा। फिजिकल गोल्ड और गोल्ड फंड्स 24 महीने के बाद लॉन्ग-टर्म माने जाते हैं और इन पर 12.
5 फीसदी टैक्स लगता है, वहीं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से टैक्स योग्य रहता है। ।
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