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दिवाली पर कंपनी से मिली Kia Sonet? खुश होने से पहले जान लें ये जरूरी टैक्स नियम

DARSH NEWS डेस्क • 07 Nov 2026, 05:54 PM IST
दिवाली पर कंपनी से मिली Kia Sonet? खुश होने से पहले जान लें ये जरूरी टैक्स नियम

आज 7 नवंबर को सोशल मीडिया पर ऐसी कई रील्स छाई हुई हैं, जिनमें बॉसेज अपनी टीमों को किआ सॉनेट (Kia Sonet) की चाबियां सौंपते दिख रहे हैं। इनमें से सबसे ज्यादा चर्चा पंचकूला के MITS ग्रुप की हो रही है। कंपनी के फाउंडर एमके भाटिया ने 27 अक्टूबर को अपने कर्मचारियों को चार सॉनेट एसयूवी गिफ्ट की थीं।

मीडिया में खबर आने के बाद इसका वीडियो आज फिर से तेजी से वायरल हो रहा है। वैसे इस हफ्ते कुछ और कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को आईफोन 16 (iPhone 16) गिफ्ट करने को लेकर खूब सुर्खियां बटोर रही हैं। दिवाली गिफ्टिंग में किआ सॉनेट के छाए रहने की बड़ी वजह इसका प्रीमियम लुक और किफायती दाम है।

फेस्टिव सीजन में डीलर्स भी जमकर कॉर्पोरेट डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस ऑफर करते हैं। इससे कंपनियों के लिए एक साथ कई गाड़ियाँ ऑर्डर करना और वक्त पर डिलीवरी पाना आसान हो जाता है। गाड़ियों की डिलीवरी जल्दी हो सके, इसके लिए कंपनियां अक्सर एक ही वेरिएंट और कलर चुनती हैं।

कई शहरों में तो हाल ही में सॉनेट पर ₹15,000 तक के कॉर्पोरेट बेनिफिट्स भी दिए गए हैं। यही वजह है कि बजट और सोशल मीडिया रील्स का तालमेल एकदम परफेक्ट बैठ जाता है। Why Kia Sonet SUVs dominate Diwali 2026 gifting अगर आपको कंपनी से कार गिफ्ट में मिली है, तो टैक्स के नियम जरूर जान लें।

टैक्स कानूनों के मुताबिक इसे टैक्सेबल परक्विजिट (अनुलाभ) माना जाता है। एम्प्लॉयर से मिला ₹5,000 से ज्यादा का कोई भी गिफ्ट सैलरी हेड के तहत टैक्सेबल होता है। अगर गाड़ी सीधे आपके नाम ट्रांसफर की जा रही है, तो रूल 3(7)(viii) के तहत कार की लागत में से तय डेप्रिसिएशन घटाकर टैक्स तय होता है।

यह टीडीएस आपके फॉर्म 16 में दिखेगा, इसलिए पेरोल टीम से इसका पूरा ब्रेकअप मांग लें। सोशल मीडिया पर खुशियों वाली रील पोस्ट करने से पहले यह जांच लें कि कार के इनवॉयस और इंश्योरेंस पर किसका नाम दर्ज है। रूल 47 के तहत गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म 21 (सेल सर्टिफिकेट), फॉर्म 22 (रोड-वर्दीनेस सर्टिफिकेट), आरटीओ टैक्स रसीद और टेम्परेरी रजिस्ट्रेशन बेहद जरूरी दस्तावेज हैं।

अगर कार कंपनी के नाम पर ही रहती है, तो गाड़ी इस्तेमाल करने की सीमा, फ्यूल रीइम्बर्समेंट और कंपनी छोड़ने की स्थिति में रिकवरी के नियमों को पहले ही साफ कर लें। डिलीवरी लेने से पहले अपनी टीम के साथ मिलकर मास प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन (PDI) करें और VIN नंबर से मैन्युफैक्चरिंग ईयर चेक करें।

इंश्योरेंस में वही एड-ऑन्स लें जिनकी वाकई जरूरत है, जैसे जीरो डेप्रिसिएशन, रिटर्न-टू-इनवॉयस और इंजन कवर। अगर PDI के दौरान कोई दिक्कत नजर आए, तो उसे लिखित में दर्ज कराएं और संबंधित मैनेजर को टैग करें। इन आसान स्टेप्स से आपकी खुशियां भी बरकरार रहेंगी और भविष्य में गाड़ी आपके नाम ट्रांसफर होने पर आप किसी वित्तीय या कानूनी उलझन से भी बचे रहेंगे।

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समाचार स्रोत: DARSH NEWS

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