केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना को मंजूरी दी है। ₹14,500 करोड़ की VGF योजना को मिली मंजूरी। 2031 तक 92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता का लक्ष्य।
'मेक इन इंडिया' के तहत 40% सामग्री अनिवार्य। डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और बिजली की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।
बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 14500 करोड़ रुपये की 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (VGF) योजना को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2031 तक देश में 92 गीगावॉट-घंटे (GWh) की ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित करना है। ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों , इस नई योजना से देश में मौजूदा 54 GWh स्टोरेज क्षमता में 170% की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी।
सरकार ने अनुमान लगाया है कि साल 2031-32 तक देश को कुल 411 GWh ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता होगी। 92 GWh की इस कुल क्षमता के तहत तीन तरह की स्टोरेज प्रणालियां विकसित की जाएंगी। बता दें कि इस पूरी प्रक्रिया पर अनुमानित 97,600 करोड़ रुपये का कुल निवेश होने की उम्मीद है।
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजनाओं में 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि इनमें कम से कम 40% सामग्री देश में ही निर्मित होनी चाहिए। उद्योग जगत के जानकारों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि इससे भारत आयात पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
इस बात को ऐसे समझिए कि VGF सहायता मिलने से इन परियोजनाओं की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और इनका निर्माण तेजी से हो सकेगा। परियोजनाओं के लिए क्षमता का आवंटन टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों सेक्टर की बिजली वितरण कंपनियां हिस्सा ले सकेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे ग्रिड में सोलर और विंड एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) की हिस्सेदारी बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस तरह के स्टोरेज सिस्टम चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में बेहद मददगार साबित होंगे। ।
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