शुक्रवार, 06 नवंबर 2026 01:36 PM IST
DARSH NEWS
🌤️ 26°C
बिजनेस अखिल भारतीय 17,067 व्यूज

SEBI का बड़ा फैसला: म्यूचुअल फंड के लिए नेट सेटलमेंट को मंजूरी, जानें निवेशकों पर क्या होगा असर

DARSH NEWS डेस्क • 06 Nov 2026, 11:13 AM IST
SEBI का बड़ा फैसला: म्यूचुअल फंड के लिए नेट सेटलमेंट को मंजूरी, जानें निवेशकों पर क्या होगा असर

कैश मार्केट में म्यूचुअल फंड स्कीम्स के लिए नेट सेटलमेंट ऑफ फंड्स को पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने मंजूरी दे दी है। 5 नवंबर 2026 को जारी इस सर्कुलर के नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। इस बदलाव का मुख्य मकसद बैक-ऑफिस के कामकाज को बेहतर बनाना और फंड हाउसों की शॉर्ट-टर्म फंडिंग की जरूरतों को कम करना है।

SIP में निवेश करने वाले आम निवेशकों के लिए अभी कुछ नहीं बदला है और उन्हें फिलहाल कोई कदम उठाने की जरूरत नहीं है। नए फ्रेमवर्क के तहत, एक ही स्कीम और सेटलमेंट साइकिल के दौरान केवल पूरी तरह से खरीद (outright buy) या बिक्री (outright sell) वाले ट्रेड्स पर ही फंड नेटिंग की सुविधा मिलेगी।

वहीं सिक्योरिटी सेटलमेंट, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और स्टैंप ड्यूटी पहले की तरह ही ग्रॉस बेसिस पर तय होंगे। अगर एक ही सिक्योरिटी में खरीद और बिक्री दोनों तरह के ट्रेड हुए हैं, तो उन्हें इससे बाहर रखा गया है। सेबी का मकसद डिलीवरी-बेस्ड सेटलमेंट के नियमों को प्रभावित किए बिना प्रक्रिया को ज्यादा आसान बनाना है।

SEBI नेट सेटलमेंट: SIP निवेशकों और NAV पर क्या होगा असर? आपकी SIP, STP और SWP प्रोसेसिंग पहले की तरह ही बिना किसी रुकावट के चलती रहेगी। NAV कट-ऑफ और यूनिट्स के अलॉटमेंट में कोई बदलाव नहीं होगा।

सर्कुलर में साफ कहा गया है कि स्कीम के हिसाब से होने वाली अकाउंटिंग और NAV की कैलकुलेशन पर इसका कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। 1 अप्रैल 2027 तक मौजूदा व्यवस्था के तहत ही काम होता रहेगा। इस बीच AMC और कस्टोडियन अपने सिस्टम को अपग्रेड करेंगे, जबकि AMFI इसे लागू करने के लिए जरूरी स्टैंडर्ड जारी करेगा।

जो स्कीम्स कैश मार्केट में ज्यादा ट्रेडिंग करती हैं—खासकर इक्विटी फंड्स—उन्हें अपनी अस्थायी फंडिंग की जरूरतों को कम करने में ज्यादा मदद मिलेगी। यह नियम सेबी के इंट्राडे उधारी ढांचे (Intraday Borrowing Framework) के भी अनुकूल है, जिसके तहत ऐसे खर्च का बोझ AMC को खुद उठाना पड़ता है, न कि स्कीम पर डाला जाता है।

ऐसे में फंड नेटिंग से लिक्विडिटी की दिक्कतें कम होंगी और आगे चलकर मार्केट कॉम्पिटिशन के आधार पर टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) का दबाव भी घट सकता है। आने वाले दिनों में AMFI फाइल फॉर्मेट, कट-ऑफ, रीकंसिलेशन और एक्सेप्शन हैंडलिंग को लेकर दिशानिर्देश जारी करेगा। साथ ही स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन भी अपने सिस्टम में जरूरी बदलाव करेंगे।

यह नियम 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी हो रहा है, इसलिए वित्त वर्ष 2027 (FY27) के डिस्क्लोजर, बोर्ड नोट्स और स्कीम डॉक्यूमेंट्स में होने वाले ऑपरेशनल अपडेट्स पर नजर रखें। TER पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह AMC की नीतियों और इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। वहीं आपके निवेश का रिटर्न हमेशा की तरह बाजार के उतार-चढ़ाव और स्कीम की रणनीति पर ही निर्भर करेगा।

।

समाचार स्रोत: DARSH NEWS

पाठक प्रतिक्रियाएं

इस श्रेणी की अन्य ख़बरें

बिजनेस • अखिल भारतीय

₹199 से कम में अनलिमिटेड कॉलिंग और SMS! Jio, Airtel और Vi के नए रिचार्ज प्लान्स की पूरी लिस्ट देखें

बिजनेस • अखिल भारतीय

शेयर बाजार में आज 4 SME IPO की धमाकेदार एंट्री: मैक्सवेल और HGS पर टिकी नजरें, जानें GMP का हाल

बिजनेस • अखिल भारतीय

US Stock Market Crash का भारतीय शेयर बाजार पर असर, Nifty-Sensex की रैली को लगेगा ब्रेक, निवेशकों को झटका?

बिजनेस • अखिल भारतीय

6 नवंबर को सोने के दाम में फिर उछाल! क्या आज खरीदना सही है? जानें 24 और 22 कैरेट का ताजा रेट

बिजनेस • अखिल भारतीय

UPI पर चार्ज लगाने के फैसले पर आ गया नया अपडेट, NCPI ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?

बिजनेस • अखिल भारतीय

HDFC FD रेट्स में बड़ा उछाल: क्या अब PPF और म्यूचुअल फंड से बेहतर है निवेश?

बिजनेस • अखिल भारतीय

फेस्टिवल सेल का आखिरी मौका: बैंक ऑफर्स और डिस्काउंट का गणित समझकर बचाएं हजारों रुपये

होम
राजनीति
खेल
सिनेमा
वायरल