बृहस्पतिवार की रात आए भीषण आंधी-तूफान ने छुटमलपुर क्षेत्र में ऐसी तबाही मचाई कि किसानों की सालभर की कमर ही टूट गई है।
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तेज हवाओं के साथ आए इस बवंडर ने सैकड़ों पेड़ों को जड़ से उखाड़ फेंका और बिजली के खंभों व तारों को तहस-नहस कर दिया, जिसके कारण पूरे इलाके में रात से ही घाना अंधेरा पसरा हुआ है और लोग बूंद-बूंद पानी व बिजली के लिए तरस रहे हैं।
इस आपदा का सबसे बड़ा प्रहार किसानों की फसलों पर हुआ है। छुटमलपुर नवीन मंडी के आढ़ती शाकिर मलिक के मुताबिक, तूफान के कारण समय से पहले टूटे करीब 15 से 20 हजार आम के कट्टे मंडी में पहुंच तो गए हैं।
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लेकिन जो कट्टा पहले 200-250 रुपये में बिकता था, आज उसे 50-60 रुपये में भी कोई पूछने वाला नहीं है। आंधी ने न सिर्फ बागों से आम नीचे गिरा दिए, बल्कि जो पेड़ पर बचे हैं उन्हें भी दागदार कर दिया है।
खेतों का मंजर देखकर किसानों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, क्योंकि आम और लीची के साथ-साथ पॉपुलर के पेड़ और हरी सब्जियों की फसलें भी पूरी तरह जमींदोज हो चुकी हैं।
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बेबस किसान यूनुस ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उनकी पूरे साल की मेहनत एक ही रात में मटियामेट हो गई और अब उनके सामने बच्चों की स्कूल फीस भरने और परिवार में शादी-ब्याह निपटाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
इधर, बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सुबह से ही मौके पर डटे हुए हैं और युद्धस्तर पर लाइनों को ठीक करने का काम जारी है, लेकिन नुकसान इतना व्यापक है कि पूरी तरह आपूर्ति बहाल होने में 24 से 48 घंटे का समय लग सकता है।
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इस भारी विपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कांग्रेस की जिला उपाध्यक्ष डॉ. शाजिया नाज किसानों के समर्थन में आगे आई हैं।
उन्होंने कहा कि पहले से ही आर्थिक मंदी झेल रहे हमारे अन्नदाता पर यह कुदरती मार बर्दाश्त के बाहर है। डॉ. नाज ने जिला प्रशासन और सरकार से पुरजोर मांग की है कि तुरंत विशेष टीमों को भेजकर फसलों के नुकसान का सटीक आकलन (सर्वे) कराया जाए और पीड़ित किसानों को बिना देरी किए उचित मुआवजा दिया जाए।
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उन्होंने बिजली विभाग से भी काम में तेजी लाने को कहा और किसानों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि 'वे खुद को अकेला न समझें, उनका संकल्प जनसेवा है और वह इस संकट में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं।'
अपनी इसी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ. नाज ने एलान किया कि वह कल सुबह खुद प्रभावित गांवों और नवीन मंडी का दौरा कर जमीनी हकीकत देखेंगी और किसानों की इस गूंज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाकर दम लेंगी।
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