अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला (फोटो-) अनिवार्य सेवानिवृत्ति दंडात्मक नहीं, प्रतिष्ठा पर आंच नहीं। जनहित और प्रशासनिक दक्षता के लिए आवश्यक निर्णय। छत्तीसगढ़ सरकार का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश देना न तो दंडात्मक होता है और न ही इससे उसकी प्रतिष्ठा पर आंच आती है। ऐसे आदेश से कर्मचारी के आचरण पर कोई आक्षेप नहीं लगता और न ही इसका मतलब यह है कि वह कदाचार का दोषी पाया गया है।
जस्टिस मनमोहन और श्री चंद्रशेखर की पीठ ने शुक्रवार को पांच कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के छत्तीसगढ़ सरकार के आदेश को बरकरार रखा। कहा कि ऐसा फैसला सक्षम अधिकारी के इस आकलन पर आधारित होता है कि संबंधित कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना अब जनहित में नहीं है।
पीठ ने कहा कि किसी अधिकारी की उपयोगिता समाप्त हो गई है या उसे सेवा में बनाए रखना प्रशासनिक दक्षता के लिए नुकसानदेह होगा, इसका अंतिम आकलन करना कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि, ऐसा आकलन महज अटकलों या मनमर्जी पर आधारित नहीं हो सकता। इसके लिए रिकार्ड में उपलब्ध ठोस और प्रासंगिक सामग्री का होना जरूरी है।
शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 12 अप्रैल, 2023 के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को सही ठहराया था, जिसमें कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने संबंधी राज्य सरकार के 2017 के परिपत्र को बरकरार रखा गया था। अदालत ने कहा कि कोई कर्मचारी केवल इस आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को चुनौती नहीं दे सकता कि समान सेवा रिकार्ड वाले किसी अन्य अधिकारी के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की गई।
किसी कर्मचारी की उपयोगिता, ईमानदारी, कार्यकुशलता और समग्र सेवा रिकार्ड का आकलन व्यक्तिगत स्तर पर किया जाता है। एक कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने और समान स्थिति वाले दूसरे कर्मचारी को छोड़ दिए जाने मात्र से कार्रवाई असंवैधानिक या भेदभावपूर्ण नहीं हो जाती। पीठ ने कहा कि सभी कर्मचारियों के रिकार्ड की जांच के बाद ही जांच समिति ने ऐसे पांच कर्मचारियों की पहचान की, जिनका समग्र सेवा रिकॉर्ड निर्धारित मानक से नीचे था।
उनकी हालिया गोपनीय रिपोर्ट से असंतोषजनक प्रदर्शन, घटती कार्यकुशलता या सरकारी सेवा में उनकी उपयोगिता कम होने के संकेत मिले थे। शेष नौ कर्मचारी निर्धारित मानकों पर खरे उतरे थे और उन्हें सेवा में बनाए रखने के योग्य पाया गया था। ।
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