पेट्रोलियम मंत्रालय ने E20 पेट्रोल में 26-31% एथनॉल मिलाने के आरोपों को खारिज किया है, कहा कि जांच में एथनॉल की मात्रा तय मानक 20% के अनुरूप पाई गई। पेट्रोलियम मंत्रालय ने E20 में अधिक एथनॉल के आरोप नकारे। 27 राज्यों के 893 नमूनों में एथनॉल 20% के अनुरूप।
राहुल गांधी ने E20 नीति पर सरकार से जवाब मांगा। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की ओर से सप्लाई किए जाने वाले ई20 पेट्रोल में 26-31 प्रतिशत तक एथनॉल मिलाए जाने के आरोपों को खारिज किया है। मंत्रालय , 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लिए गए 893 नमूनों की जांच में एथनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत के तय मानक के अनुरूप मिली।
यही नहीं, जिस कर्नाटक में ई20 में अधिक एथनॉल मिलाए जाने के दावे किए जा रहे हैं, वहां भी सितंबर में लिए गए 56 नमूनों की जांच में भी एथनॉल 19 से 20 प्रतिशत तक पाया गया। बता दें कि एक रोज पूर्व कर्नाटक सरकार ने पेट्रोल में निर्धारित 20 प्रतिशत की सीमा से अधिक एथनॉल मिलाए जाने का आरोप लगाया था।
राज्य सरकार का दावा था कि पेट्रोल के 63 नमूनों की जांच में कई कंपनियों के ई20 पेट्रोल में 30 प्रतिशत से अधिक एथनॉल पाया गया। मंत्रालय ने कर्नाटक में ई20 नमूने लेने और उनकी जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उस, निरीक्षण के दौरान एक-एक लीटर के छह नमूने लिए जाते हैं।
इनमें से दो डीलर को दिए जाते हैं, दो तेल कंपनी या विभाग के पास रखे जाते हैं और दो अधिकृत प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं। सच्चाई यह है कि सितंबर में एकत्र किए गए नमूने राज्य स्तरीय समन्वयक के माध्यम से नामित कंपनी प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे। लेकिन बाद में अक्टूबर में तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों को प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया।
राज्य से विस्तृत जानकारी मांगे जाने के बावजूद संबंधित रिटेंशन नमूने, आउटलेटवार जानकारी और प्रयोगशाला रिपोर्ट नहीं दी गईं। जाहिर है कंपनियों ने एक थर्ड-पार्टी प्रयोगशाला द्वारा जारी प्रमाणपत्रों पर भी सवाल उठाया। मंत्रालय के मुताबिक, 26-31 प्रतिशत एथनॉल वाले नमूनों की घनत्व रीडिंग 0.
742-0. 749 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर थी, जबकि तेल कंपनियों के ई20 नमूनों में यह 0. 752-0.
760 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर रही। एथनॉल पेट्रोल से सघन होता है, इसलिए अधिक मात्रा में मिलाने पर घनत्व बढ़ना चाहिए। इसके उलट, कर्नाटक की थर्ड-पार्टी जांच में घनत्व कम दिखाया गया।
मंत्रालय ने इन नमूनों की स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई। पेट्रोलियम मंत्रालय ने ई20 के कारण उपभोक्ताओं को सालाना लगभग 62,000 करोड़ रुपये के माइलेज नुकसान और 39,000 करोड़ रुपये की वाहन मरम्मत लागत समेत 1. 01 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ने के आरोप भी खारिज किए।
अंतर-मंत्रालयी समिति, इंडियन आयल, आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन आफ इंडिया और सोसाइटी आफ इंडियन आटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स से जुड़े अध्ययनों का हवाला देते मंत्रालय ने कहा कि माइलेज पर असर वाहन श्रेणी और इंजन कैलिब्रेशन अलग-अलग होता है। कुछ वाहनों में माइलेज लगभग एक से दो प्रतिशत, जबकि कुछ में तीन से छह प्रतिशत तक घट सकता है।
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