रविवार, 8 नवंबर को म्यूचुअल फंड खरीदने पर आपको उस दिन की NAV नहीं मिलेगी। ये ऑर्डर सोमवार, 9 नवंबर के खाते में जाएंगे और यूनिट्स का अलॉटमेंट फंड हाउस तक पैसा पहुंचने के आधार पर तय होगा। खरीदारी हो या बिक्री (रिडेम्पशन), दोनों ही मामलों में दोपहर 3 बजे का कट-ऑफ टाइम लागू रहेगा।
अगर पैसा कट-ऑफ टाइम के बाद पहुंचता है, तो अलॉटमेंट अगले कामकाजी दिन होगा। ध्यान रखें कि इस कैलेंडर के मुताबिक मंगलवार, 10 नवंबर को शेयर बाजार बंद रहेगा। सोमवार की NAV पाने के लिए सिर्फ आपके खाते से पैसा कटना ही काफी नहीं है, बल्कि वह रकम फंड हाउस को मिल भी (रिअलाइज) जानी चाहिए।
UPI से भुगतान करने पर भले ही खाते से तुरंत पैसा कट जाए, लेकिन फंड हाउस तक पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है। नेट बैंकिंग NEFT से रकम बैंकिंग समय के दौरान क्रेडिट होती है, जबकि IMPS ज्यादा तेज है। कुछ बैंक म्यूचुअल फंड ट्रांसफर में T+1 सेटलमेंट टाइम दिखाते हैं।
इसलिए कट-ऑफ की आखिरी समय की हड़बड़ी से बचने के लिए सोमवार को सुबह ही, मुमकिन हो तो दोपहर 12 बजे से पहले पैसे ट्रांसफर कर दें। दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग के दिन MF ऑर्डर: जानें NAV और कट-ऑफ नियमअगर आप संडे को बाय ऑर्डर देते हैं, तो वे सोमवार सुबह ही रजिस्ट्रार तक पहुंच पाते हैं।
अगर आपका पैसा सोमवार दोपहर 3 बजे से पहले फंड हाउस के पास पहुंच जाता है, तो आपको सोमवार, 9 नवंबर की NAV मिलेगी। अगर यह मौका चूक गया, तो बाजार की छुट्टी के बाद आने वाले अगले वर्किंग डे की NAV लागू होगी। रिडेम्पशन के मामलों में भी उसी दिन की NAV के लिए दोपहर 3 बजे का नियम लागू होता है।
रविवार को पड़ने वाली SIP की तारीखों की प्रोसेसिंग अगले वर्किंग डे पर होती है। यानी 8 नवंबर की SIP के लिए सोमवार, 9 नवंबर को बैंक खाते से पैसा काटने का प्रयास किया जाएगा। अगर पैसा दोपहर 3 बजे के बाद कटता है, तो खरीदारी अगले बिजनेस डे की NAV पर शिफ्ट हो जाएगी।
STP और SWP भी कामकाजी दिनों में ही एग्जीक्यूट होते हैं, इसलिए अपने खाते में बैलेंस उसी अनुसार बनाए रखें। छुट्टियों की लंबी कतार को देखते हुए अपनी SIP दो दिन पहले ही शेड्यूल कर लेना समझदारी होगी। दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन के दौरान एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) लाइव मार्केट प्राइस पर ट्रेड करते हैं।
दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड में यूनिट्स का अलॉटमेंट अगले वर्किंग डे की NAV व्यवस्था के तहत ही होता है। अगर आपको तुरंत ट्रेड करना है तो ETF सही विकल्प है, लेकिन लिक्विडिटी, स्प्रेड, ब्रोकरेज और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर ध्यान जरूर दें। इक्विटी में शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स पर 15 फीसदी टैक्स लगता है, वहीं एग्जिट लोड से भी आपकी कुल बचत कम हो सकती है।
त्योहारी दिनों में किसी भी परेशानी से बचने के लिए अभी से अपना KYC, बैंक मैंडेट और ट्रांजैक्शन लिमिट जांच लें। ऊपर दी गई तुलना केवल समझाने के उद्देश्य से है; म्यूचुअल फंड का रिटर्न बाजार जोखिमों के अधीन होता है। ।
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