शुक्रवार, 06 नवंबर 2026 08:41 AM IST
DARSH NEWS
🌤️ 19°C
देश अखिल भारतीय 8,120 व्यूज

'शीघ्र सुनवाई एक मौलिक अधिकार है', सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कोई कानून और नियम संविधान से ऊपर नहीं

DARSH NEWS डेस्क • 06 Nov 2026, 07:31 AM IST
'शीघ्र सुनवाई एक मौलिक अधिकार है', सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कोई कानून और नियम संविधान से ऊपर नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा संविधान सभी कानूनों और नियमों से ऊपर है कोर्ट ने कहा कोई विशेष कानूनों के विरोधाभास या टकराव होने पर संविधान ही प्रभावी होगा सुप्रीम कोर्ट ने कहा मौलिक अधिकारों के साथ हल्के ढंग से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान सभी कानूनों और नियमों से ऊपर है।

एनडीपीएस, यूएपीए और पीएमएलए जैसे विशेष कानूनों के साथ संविधान के प्रविधानों में कोई विरोधाभास या टकराव होने पर संविधान ही प्रभावी होगा। जस्टिस उज्जवल भुयान और जस्टिस ए. एस.

चंदुरकर की बेंच ने दोहराया कि त्वरित सुनवाई (स्पीडी ट्रायल) का अधिकार मौलिक अधिकार है। इसे किसी भी कानून के तहत उल्लंघन नहीं किया जा सकता और यह जमानत का आधार बन सकता है। बेंच ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए अधिकार सिर्फ संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि मौलिक अधिकार हैं।

जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार हमारे संवैधानिक न्यायशास्त्र के मूल में है। इन मौलिक अधिकारों के साथ हल्के ढंग से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता, चाहे विशेष कानून ही क्यों न हों। अदालत ने अपने ही पहले के एक आदेश पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि एनडीपीएस एक्ट जैसे विशेष कानूनों में आरोपी को अनुच्छेद 21 का अधिकार धारा 37 की सख्त शर्तों के अंदर ही इस्तेमाल करना होगा और सिर्फ देरी के आधार पर धारा 37 को ओवरराइड नहीं किया जा सकता।

बेंच ने स्पष्ट किया कि संविधान की व्याख्या कानूनों के आधार पर नहीं, बल्कि कानूनों की व्याख्या संविधान के आधार पर होनी चाहिए। एक कानून, विशेष हो या सामान्य, संविधान की व्याख्या का मार्गदर्शक नहीं बन सकता। उल्टा होना चाहिए।

मौलिक अधिकार की व्याख्या इस तरह होनी चाहिए कि वह उस अधिकार के उद्देश्य को आगे बढ़ाए। यह फैसला पीएमएलए, एनडीपीएस और यूएपीए मामलों में ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अंदर मतभेदों के बीच आया है। कुछ बेंचों का कहना था कि त्वरित सुनवाई का अधिकार जमानत का आधार नहीं बन सकता, जबकि कुछ अन्य बेंचों ने इसके विपरीत रुख अपनाया था।

अब यह मुद्दा बड़ी बेंच के पास भेज दिया गया है। देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।

।

समाचार स्रोत: DARSH NEWS

पाठक प्रतिक्रियाएं

इस श्रेणी की अन्य ख़बरें

देश • अखिल भारतीय

'शीघ्र सुनवाई एक मौलिक अधिकार है', सुप्रीम कोर्ट ने कहा संविधान सभी कानूनों और नियमों से ऊपर है

देश • अखिल भारतीय

'एक ही परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची में फिर से जोड़ने का आदेश', बांबे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

देश • अखिल भारतीय

हादसे से पांच सेकेंड पहले 162 किमी प्रति घंटा थी मिनी कूपर की रफ्तार, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

देश • अखिल भारतीय

भारत-फिलीपींस के बीच 800 मिलियन डॉलर की बड़ी डिफेंस डील, मनीला फिर खरीदेगा 60 ब्रह्मोस मिसाइलें

देश • New Delhi

पीएम आवास के पास कीमती जमीन की वापसी, वायु सेना ने L&DO को सौंपा 39.5 एकड़ का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

देश • अखिल भारतीय

इस्तीफा देने के बाद नहीं मिलेंगे भत्ते और सुविधाएं? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

देश • अखिल भारतीय

UGC रेगुलेशन क्या है? सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद एक्शन में सरकार, गठित होगी नई कमेटी

होम
राजनीति
खेल
सिनेमा
वायरल