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27 साल पुराने मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: राज्यों का अतिरिक्त बिक्री कर लगाने का अधिकार सही

DARSH NEWS डेस्क • 04 Nov 2026, 10:59 PM IST
27 साल पुराने मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: राज्यों का अतिरिक्त बिक्री कर लगाने का अधिकार सही

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों द्वारा अतिरिक्त बिक्री कर या सरचार्ज लगाने के अधिकार को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के अतिरिक्त बिक्री कर अधिकार को बरकरार रखा जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्यों द्वारा अतिरिक्त बिक्री कर या सरचार्ज लगाने के अधिकार को बरकरार रखा है।

कोर्ट ने कहा कि 1974 की संविधान पीठ का वह फैसला अब भी प्रभावी है, जिसमें राज्यों को अतिरिक्त बिक्री कर या अधिभार (सरचार्ज) लगाने का अधिकार दिया गया था। यह अधिभार मौजूदा बिक्री कर के एक प्रतिशत के रूप में तय किया जाता है। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सात-जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि लगभग 27 साल पहले भेजा गया कानूनी संदर्भ अब व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण नहीं रहा है और यह केवल एक सैद्धांतिक (अकादमिक) मुद्दा बन चुका है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पांच-जजों की पीठ का 'एस कोदार बनाम केरल राज्य' (1974) का फैसला अब भी पूरी तरह प्रभावी है। उस पुराने फैसले में अतिरिक्त बिक्री कर को इस आधार पर सही ठहराया गया था कि बिक्री कर पर आधारित अतिरिक्त कर या सरचार्ज वास्तव में बिक्री कर की दर में वृद्धि ही है, न कि डीलरों की आय पर कर।

कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्यों के पास इस तरह का सरचार्ज लगाने की विधायी क्षमता 'एस कोदार' मामले में तय किए गए सिद्धांतों से ही संचालित होगी। सीजेआइ ने कहा कि चूंकि संबंधित वैधानिक प्रविधानों में संशोधन हो चुका है और देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून लागू हो चुका है, इसलिए अब इस पर नए सिरे से विचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

सात-जजों की संविधान पीठ में सीजेआइ के अलावा जस्टिस के. वी. विश्वनाथन, जस्टिस एस.

वी. भट्टी, जस्टिस जोयमल्या बागची, जस्टिस एन. वी.

अंजारिया, जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। यह विवाद मूल रूप से ओडिशा सेल्स टैक्स एक्ट, 1947 की धारा 5ए को चुनौती देने से जुड़ा था।

इसके तहत एक निश्चित टर्नओवर वाले डीलरों पर 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त कर लगाया जाता था। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया था कि क्या राज्य विधानमंडल के पास संविधान की सातवीं अनुसूची की द्वितीय सूची की प्रविष्टि 54 के तहत ऐसा कर लगाने की शक्ति है, या यह संसद के अधिकार क्षेत्र में आने वाला 'आय पर कर' है।

हालांकि, सुनवाई के दौरान सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी यह दलील दी थी कि 2017 में जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद यह विवाद बड़े पैमाने पर केवल सैद्धांतिक (अकादमिक) रह गया है। देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।

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समाचार स्रोत: DARSH NEWS

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