अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत से भारत को टैरिफ पर मिलेगी राहत। () डेमोक्रेटिक जीत से ट्रंप की राजनीतिक स्थिति कमजोर, भारत को लाभ। टैरिफ, व्यापार और एच-1बी वीजा पर भारत को राहत।
रूसी तेल खरीद पर भारत के लिए नई चुनौतियां संभव। जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर नियंत्रण हासिल करने और सीनेट में महत्वपूर्ण बढ़त दर्ज करने से राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की राजनीतिक स्थिति कमजोर पड़ गई है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर इसका सीधा और बड़ा असर तो नहीं पड़ेगा लेकिन भारतीय उत्पादों पर शुल्क लगाने, व्यापार , एच-1बी वीजा जैसे मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन पर निगरानी बढ़ने का परोक्ष तौर पर फायदा निश्चित तौर पर भारत को होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत को कुछ क्षेत्रों में सीमित राहत मिल सकती है, जबकि रक्षा और सामरिक साझेदारी पर निरंतरता बनी रहेगी।
हालांकि अमेरिकी संसद का नया स्वरूप रूस से तेल खरीद जैसे मुद्दे या ईरान के साथ संबंधों को लेकर भारत सरकार की चुनौती बढ़ाने वाली भी साबित हो सकती है। अमेरिका से साफ संकेत आ रहे हैं कि डेमोक्रेटिक नियंत्रित हाउस अब संसदीय समितियों के माध्यम से प्रशासन की नीतियों की जांच कर सकता है, सुनवाई आयोजित कर सकता है और ट्रंप की कुछ महत्वाकांक्षी विधेयकों को धाराशायी कर सकता है।
भारत के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में द्विपक्षीय संबंधों में टैरिफ, रूसी तेल खरीद पर दबाव और एच-1बी वीजा प्रतिबंधों को लेकर तनाव बढ़ा था। फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा अभी भी अंतिम रूप नहीं ले पाया है। व्यापार और टैरिफ के मोर्चे पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है।
ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर पारस्परिक टैरिफ और रूसी तेल खरीद को लेकर अतिरिक्त दबाव डाला था। डेमोक्रेटिक हाउस इन टैरिफ नीतियों पर सुनवाई और जांच कर सकता है तथा राष्ट्रपति की टैरिफ लगाने की शक्तियों को सीमित करने के प्रयास कर सकता है। इससे भारत को चल रही व्यापार ओं में थोड़ी बेहतर सौदेबाजी की स्थिति मिल सकती है।
भारत और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी लगातार कह रहे हैं कि कारोबारी समझौते को लेकर बातचीत करीब-करीब पूरी हो चुकी है और अब अंतिम रूप दिया जाना शेष है। इसके बावजूद यह याद रखना चाहिए कि ट्रंप के पास वीटो शक्ति और कार्यकारी प्राधिकरण अभी भी बरकरार है। अमेरिका का नया समीकरण एच-1बी वीजा और आव्रजन नीति पर भी ट्रंप प्रशासन की बेहद लोकलुभावन व राष्ट्रवादी नीतियों में बदलाव का दबाव बना सकता है।
ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में कुछ नई एच-1बी याचिकाओं पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाई थी, जिसे बाद में एक वर्ष और बढ़ा दिया गया। अदालतों ने कुछ मामलों में इस फीस के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है। ।
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