पहाड़ों की रानी मसूरी में एडवेंचर पर्यटन और आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट, केम्प्टी फॉल्स मसूरी में 28 से 30 मई तक वाइल्डनेस फर्स्ट एड (डब्ल्यूएफए) प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
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यू.एस. स्कूल ऑफ सर्वाइवल के सहयोग से आयोजित इस 16 घंटे के आवासीय प्रमाणन पाठ्यक्रम में प्रतिभागियों को कठिन परिस्थितियों में जीवन बचाने की महत्वपूर्ण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण का संचालन प्रसिद्ध पूर्व यूएस मरीन कॉर्प्स प्रशिक्षक जॉन डॉबिन्स के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। जॉन डॉबिन्स इससे पूर्व येल, डार्टमाउथ और कोलंबिया विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्रों को भी प्रशिक्षण दे चुके हैं।
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मसूरी में आयोजित यह प्रशिक्षण विशेष रूप से उत्तराखंड के पर्वतीय और आपदा संभावित क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जहां कई बार दुर्घटना या आपदा के दौरान पेशेवर चिकित्सा सहायता पहुंचने में देरी हो जाती है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जंगल, पहाड़ और दूरस्थ क्षेत्रों में घायल व्यक्तियों को प्राथमिक उपचार देने, आपातकालीन स्थिति में निर्णय लेने, घायल व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और सीमित संसाधनों में जीवन रक्षक उपाय अपनाने की जानकारी दी जा रही है।
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प्रशिक्षकों ने बताया कि इस तरह के कौशल ट्रैकिंग, कैंपिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स और आपदा राहत कार्यों में बेहद उपयोगी साबित होते हैं।रोटरी क्लब मसूरी ने भी इस पहल को समर्थन देते हुए पांच छात्रों को आर्थिक सहयोग प्रदान किया।
क्लब अध्यक्ष दीपक अग्रवाल, संयोजक रजत अग्रवाल और निदेशक सुविग्या सभरवाल ने कहा कि युवाओं को इस प्रकार के प्रशिक्षण से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे प्रशिक्षित युवा मसूरी और उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन और पर्यटन सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मसूरी से पायल नेगी, अमन नेगी, वर्णिका मित्तल, अरनव बंसल और अस्मिता नौटियाल प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रतिभागियों ने कहा कि यह प्रशिक्षण उनके लिए नया अनुभव है और इससे उन्हें आत्मविश्वास के साथ आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में इस प्रकार के वाइल्डनेस फर्स्ट एड प्रशिक्षण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ पर्यटन और एडवेंचर गतिविधियों को भी अधिक सुरक्षित बनाने में सहायक साबित होंगे।
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