पणजी के गोवा कॉलेज ऑफ होम साइंस ने युवाओं के लिए 'मैरिज रेडिनेस' नामक एक विशेष सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है। युवा जीवनसाथी के साथ अटूट रिश्ते की डोर थामने का सीखेंगे हुनर। गोवा कॉलेज ने शुरू किया 'मैरिज रेडिनेस' सर्टिफिकेट कोर्स।
युवाओं को स्वस्थ, स्थायी रिश्तों और जिम्मेदारियों के लिए तैयार करेगा। बढ़ते तलाक के मामलों पर अंकुश लगाने की महत्वपूर्ण पहल। डिजिटल डेस्क, पणजी।
हम अपने भविष्य और करियर को संवारने में जिंदगी के शुरुआती 15 से 20 साल कड़े संघर्ष, पढ़ाई और ट्रेनिंग में बिता देते हैं। स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक डिग्रियां हासिल करते हैं ताकि पेशेवर जिंदगी कामयाब हो सके। लेकिन जिस हमसफर के साथ हमें अपने जीवन का सबसे लंबा और खूबसूरत सफर तय करना होता है, उस पावन बंधन और परिवार की असल जिम्मेदारी के लिए हम कितना वक्त निकालते हैं?
इसी बेहद गंभीर, संवेदनशील और विचारणीय सवाल के साथ गोवा के एक कॉलेज ने युवाओं को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाने की एक अनूठी पहल की शुरुआत की है। पणजी स्थित गोवा कॉलेज आफ होम साइंस के मानव विकास और परिवार अध्ययन विभाग ने "मैरिज रेडिनेस: प्रिपेयरिंग फार हेल्दी एंड लास्टिंग रिलेशनशिप्स" नामक एक विशेष सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है।
कॉलेज के प्रिंसिपल महेश पाई , यह 15 दिवसीय कोर्स दो से 17 दिसंबर, 2026 के बीच आयोजित किया जाएगा। यह कोर्स केवल शादी की रस्मों और समारोह की तैयारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो दिलों के बीच आपसी समझ, अटूट प्रतिबद्धता और वैवाहिक जीवन की वास्तविक जिम्मेदारियों को गहराई से समझने पर केंद्रित है।
यह महत्वपूर्ण कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब समाज में रिश्तों की डोर कमजोर पड़ रही है और तलाक के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखने को मिल रही है। गोवा के विधि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2025 के बीच राज्य की सिविल अदालतों में तीन हजार से अधिक विवाह और तलाक से जुड़े मामले दर्ज किए गए, जिनमें अकेले साल 2024 में 947 मामले शामिल थे।
हाल ही में पणजी में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी राज्य में बढ़ते तलाक के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए 'प्री-मैरिज काउंसलिंग' शुरू करने की मंशा जताई थी। इसी सामाजिक सरोकार को समझते हुए कॉलेज ने यह व्यावहारिक कदम उठाया है। कॉलेज के ब्रोशर , इस कोर्स के सत्रों में युवाओं को कई महत्वपूर्ण और जीवन को दिशा देने वाले विषयों पर मार्गदर्शन मिलेगा।
इन सत्रों में "डेटिंग के उद्देश्य और गतिशीलता", "आत्म-जागृति और अपनेपन की जरूरत", "रिश्तों पर पुरुषत्व और स्त्रीत्व का प्रभाव", तथा "शादी (समारोह) और वैवाहिक जीवन के बीच का मूल अंतर" जैसे विषयों पर गहराई से चर्चा होगी। ।
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