अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिडटर्म चुनाव में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। लेकिन इस हार का असर सिर्फ ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी तक सीमित नहीं है। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क भी इसकी कीमत चुकाते दिख रहे हैं।
मस्क ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को जिताने के लिए करीब 50 करोड़ डॉलर यानी लगभग 4,700 करोड़ रुपये खर्च किए थे। उनका मकसद सिर्फ चुनाव में पार्टी की मदद करना नहीं था। वह टेक्सास को भी रिपब्लिकन के मजबूत गढ़ के रूप में बनाए रखना चाहते थे।
यही राज्य उनकी निजी रिहाइश और टेस्ला समेत उनकी कई बड़ी कंपनियों का अहम ठिकाना है। लेकिन चुनावी नतीजे मस्क की उम्मीदों के उलट रहे। डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में बढ़त हासिल कर ली।
टेक्सास में भी जीना हिनोजोसा ने ग्रेग एबॉट को हराकर तीन दशक से ज्यादा वक्त बाद राज्य में डेमोक्रेटिक गवर्नर की वापसी का रास्ता बनाया। मस्क ने मतदान शुरू होने के बाद भी सोशल मीडिया पर लोगों से रिपब्लिकन उम्मीदवारों को वोट देने की अपील की थी, लेकिन इसका उन्हें मनचाहा नतीजा नहीं मिला।
मिडटर्म में मस्क ने क्यों लगाए ₹4,700 करोड़? मस्क की रिपब्लिकन उम्मीदवारों को आर्थिक मदद देने की रणनीति के पीछे राजनीतिक हित भी जुड़े थे। वह चाहते थे कि टेक्सास में रिपब्लिकन सरकार बनी रहे ताकि उनके कारोबारी हितों को अनुकूल माहौल मिलता रहे।
इससे पहले 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भी उन्होंने ट्रंप की जीत के लिए 25 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च किए थे। Guess my election-interfering space lasers didn’t work this time 🤷♂️ ट्रंप की जीत के बाद मस्क उनकी सरकार में सरकारी दक्षता विभाग यानी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी से जुड़े थे।
लेकिन अब चुनावी नतीजों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। डेमोक्रेट्स के हाथ में कांग्रेस के दोनों सदनों की कमान आने से मस्क की कंपनियों पर भी निगरानी बढ़ सकती है। डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकर बताया दिया क्यों हारे मिडटर्म चुनाव?
कहा-'हारा पर देश के लिए सौ बार करूंगा ऐसा फैसला' अब मस्क के बिजनेस साम्राज्य पर डेमोक्रेट्स की नजर? चुनाव से पहले ऐसी रिपोर्टें आई थीं कि अगर डेमोक्रेट्स को जीत मिलती है तो वे मस्क के कारोबारी साम्राज्य की आक्रामक जांच शुरू कर सकते हैं। इसमें टेस्ला, स्पेसएक्स और उनकी दूसरी कंपनियों से जुड़े सरकारी समझौते भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
डेमोक्रेट सांसद पहले ही मस्क से जुड़े कई मामलों पर सवाल उठा चुके हैं। इनमें यूक्रेन की सैन्य सैटेलाइट संचार सेवा पर लगाई गई पाबंदियां, सरकारी दक्षता विभाग के दौरान बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरियों में कटौती और मस्क की कंपनियों को मिलने वाले सरकारी ठेके व सब्सिडी शामिल हैं।
स्पेसएक्स के लिए यह मामला खास तौर पर अहम हो सकता है। कंपनी ने अपने आईपीओ से पहले निवेशकों के सामने 28. 5 ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक पहुंच की संभावना पेश की थी।
डेटा सेंटर परियोजनाओं को मंजूरी मिलने में देरी हुई तो उसके विस्तार और इस बड़े बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने की योजना प्रभावित हो सकती है। ।
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