इस रविवार, 8 नवंबर को मुहूर्त ट्रेडिंग का खास और हाई-एनर्जी सत्र आयोजित हो रहा है। इसके लिए बेहद सीमित समय मिलेगा। प्री-ओपन सेशन दोपहर 2:05 बजे से 2:20 बजे तक चलेगा, जिसके बाद दोपहर 2:20 बजे से 3:30 बजे तक मुख्य ट्रेडिंग सेशन आयोजित होगा।
इस शुभ मुहूर्त के दौरान नए निवेशक जोखिम से बचते हुए बेहद छोटे साइज के ट्रेड, साधारण ऑर्डर और सीमित उम्मीदों के साथ शुरुआत कर सकते हैं। स्टॉक एक्सचेंजों की ओर से जारी आधिकारिक शेड्यूल के आधार पर अपनी योजना बनाएं। इस दौरान सिर्फ डिलीवरी ऑर्डर ही चुनें, इंट्राडे ट्रेडिंग से पूरी तरह बचें।
नए निवेशकों को मार्जिन इंट्राडे स्क्वायर-ऑफ (MIS) की जगह कैश एंड कैरी (CNC) का विकल्प चुनना चाहिए। इस बार फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) से दूर ही रहें। कम लिक्विडिटी वाले शेयरों में मार्केट ऑर्डर के बजाय साधारण लिमिट ऑर्डर ही लगाएं।
अगर आप सिर्फ शगुन के लिए टोकन खरीदारी कर रहे हैं, तो रकम को दो या तीन किस्तों में बांटकर लगाएं। अपना ध्यान इंडेक्स फंड्स या टॉप लार्ज-कैप शेयरों तक सीमित रखें। इसके अलावा, ट्रेडिंग ऐप में किसी तकनीकी दिक्कत की स्थिति से निपटने के लिए बैकअप के रूप में पर्याप्त कैश तैयार रखें।
मुहूर्त ट्रेडिंग की टाइमिंग और सेटलमेंट की पूरी जानकारीट्रेडिंग के समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है क्योंकि सेटलमेंट T+1 साइकिल के तहत होगा। यानी रविवार, 8 नवंबर को किए गए सौदों का सेटलमेंट अगले दिन सोमवार, 9 नवंबर को रोलिंग साइकिल के तहत किया जाएगा। खरीदे गए शेयर सोमवार शाम तक आपके डिमैट खाते में आ जाने चाहिए, जबकि रकम पे-आउट विंडो के बाद खाते में दिखेगी।
प्री-ओपन और पोस्ट-क्लोज का बफर टाइम काफी कम है, इसलिए अपने ऑर्डर की तैयारी पहले से ही करके रखें। इक्विटी डिलीवरी ट्रेड पर खरीद और बिक्री दोनों पर 0. 1 प्रतिशत का सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) लगता है, जबकि इंट्राडे इक्विटी की बिक्री पर 0.
025 प्रतिशत STT लागू होता है। इसके अलावा, सेक्शन 111A के तहत STT वाले लिस्टेड इक्विटी पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेंस (STCG) टैक्स की दर अब 20 प्रतिशत है। अपने कॉन्ट्रैक्ट नोट को संभाल कर रखें, लेजर की जांच करें और ब्रोकर स्टेटमेंट के साथ डिमैट खाते में आए शेयरों का मिलान जरूर करें।
सिर्फ खबरों या माहौल के दम पर दौड़ने वाले स्मॉलकैप शेयरों की जगह ब्रॉड-मार्केट एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) या टॉप इंडेक्स शेयरों को तरजीह दें। बोली लगाने से पहले शेयर में लिक्विडिटी और स्प्रेड की जांच जरूर कर लें। प्राइस बैंड्स और मार्केट-वाइड सर्किट ब्रेकर्स का ध्यान रखें, क्योंकि बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव होने पर ट्रेडिंग रोकी जा सकती है।
ऑर्डर को 'DAY-valid' रखें, न कि मिनट-वैलिड। अगर पेमेंट अटकता है, तो UPI के साथ-साथ नेटबैंकिंग का बैकअप तैयार रखें। छोटे-छोटे टुकड़ों में खरीदारी करने से बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो जाता है।
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