भारतीय महिला टेनिस में लंबे समय से किसी युवा खिलाड़ी के बड़े मंच पर चमकने का इंतजार था। सानिया मिर्जा ने अपने खेल से देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई थी। अब करीब 14 साल बाद एक और भारतीय खिलाड़ी ने ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने टेनिस प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
यह नाम 17 साल की माया राजेश्वरन रेवती का है। माया ने चेन्नई ओपन में शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई है। वह सानिया मिर्जा के बाद डब्ल्यूटीए टूर के सिंगल मुकाबले के अंतिम आठ में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं।
इतनी कम उम्र में उनकी यह उपलब्धि भारतीय टेनिस के लिए काफी अहम मानी जा रही है। रैंकिंग में काफी पीछे होने के बावजूद किया उलटफेर माया ने दूसरे दौर के मुकाबले में पोलैंड की वेरोनिका फाल्कोव्स्का को 6-4, 6-3 से हराया। इस मुकाबले से पहले फाल्कोव्स्का विश्व रैंकिंग में 277वें स्थान पर थीं, जबकि माया की रैंकिंग 669 थी।
इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ी ने दबाव में शानदार खेल दिखाया और सीधे सेटों में जीत हासिल की। इससे पहले माया ने पहले दौर में आठवीं वरीयता प्राप्त कातर्जिना कावा को भी हराया था। वह मुकाबला तीन सेट तक चला।
माया ने पहला सेट जीतने के बाद दूसरा गंवाया, लेकिन निर्णायक सेट में वापसी करते हुए 6-4, 2-6, 7-6(5) से मुकाबला अपने नाम किया। तीसरे सेट में 2-5 से पिछड़ने के बाद वापसी करना उनके मजबूत इरादों को दिखाता है। माया से पहले 2012 में सानिया मिर्जा ने पटाया ओपन के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी।
अब माया ने चेन्नई में यह उपलब्धि हासिल करके भारतीय महिला टेनिस में एक खास मुकाम बनाया है। इस सदी में शिखा ओबेरॉय भी 2005 में कोलकाता में डब्ल्यूटीए टूर के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं। माया का यह प्रदर्शन किसी एक टूर्नामेंट की बात नहीं नहीं है।
उन्होंने अक्टूबर में पुर्तगाल के लागोस में अपना पहला आईटीएफ डब्ल्यू35 एकल खिताब जीता था। खास बात यह रही कि उन्होंने क्वालीफाइंग दौर से शुरुआत की और पूरे टूर्नामेंट में एक भी सेट गंवाए बिना खिताब अपने नाम किया। उन्होंने युगल वर्ग में भी खिताब जीता।
अब चेन्नई ओपन के क्वार्टर फाइनल में माया का सामना अमेरिका की रॉबिन मोंटगोमरी से होगा। ।
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