Cyclone Murasu Landfall: बंगाल की खाड़ी से उठा गंभीर चक्रवाती तूफान 'मुरासु' (Cyclone Murasu) आंध्र प्रदेश के तट से टकरा चुका है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) , इस चक्रवात ने तड़के दक्षिण आंध्र प्रदेश के ओंगोल के पास नेल्लोर और नरसापुर के बीच लैंडफॉल की प्रक्रिया पूरी की।
Murasu के लैंडफॉल के समय हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जो बढ़कर 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई। खास बात यह है कि इसी इलाके में महज एक हफ्ते पहले चक्रवात 'अरनाथ' ने तबाही मचाई थी, ऐसे में 'मुरुसु' के रूप में आए इस दोहरे झटके ने तटीय जिलों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
हजारों लोग सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट, दो लोगों की मौत की पुष्टि तूफान के खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने पहले ही हाई अलर्ट जारी कर दिया था। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) , एहतियात के तौर पर संवेदनशील तटीय इलाकों से हजारों लोगों को निकालकर सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।
शुरुआती प्रशासनिक रिपोर्टों के मुताबिक, चक्रवात से जुड़े हादसों में राज्य में कम से कम दो लोगों की जान चली गई है। इसके अलावा, प्रकाशम और बापटला जिलों में हजारों पेड़ों के उखड़ने और बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त होने से कई इलाकों में बिजली गुल हो गई है। तूफान के मद्देनजर एहतियात के तौर पर विजयवाड़ा, तिरुपति और विशाखापत्तनम में दर्जनों घरेलू उड़ानें रद्द करनी पड़ी।
साथ ही, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा के कई जिलों में एहतियातन स्कूल-कॉलेज बंद रखे गए हैं। तटीय इलाकों में 1 से 1। 5 मीटर तक ऊंचे ज्वारीय लहरों (Storm Surge) की चेतावनी के बाद मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
मुरासु तूफान का असर केवल तटीय हवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण हो रही मूसलाधार बारिश से बड़े पैमाने पर कृषि को नुकसान पहुंचा है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, राज्य के कई हिस्सों में धान की खड़ी फसलें और बागवानी की फसलें पानी में डूब गई हैं। लगातार बारिश और जलभराव के कारण किसानों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि पिछले सप्ताह आए चक्रवात के जख्म अभी पूरी तरह भरे भी नहीं थे।
IMD का अनुमान है कि तट पार करने के बाद यह चक्रवात कमजोर पड़कर धीरे-धीरे डिप्रेशन में बदल जाएगा, लेकिन इसका असर पड़ोसी राज्यों पर भी दिखेगा। आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना, दक्षिण ओडिशा, छत्तीसगढ़ और उत्तरी तमिलनाडु के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
तेलंगाना के खम्माम, सूर्यपेट, नलगोंडा और वारंगल जैसे जिलों में 70 से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। प्रशासन और आपदा राहत बल (NDRF) की टीमें प्रभावित इलाकों में बहाली के काम में जुटी हुई हैं। रास्तों से गिरे हुए पेड़ों को हटाने और बाधित बिजली आपूर्ति को बहाल करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। ।
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