Drug Smuggler Darbara Singh Alias Billa Arrest: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कथित ड्रग तस्कर दरबारा सिंह उर्फ बिल्ला को पंजाब के पटियाला से गिरफ्तार किया है। 56 साल का दरबारा सिंह साल 2017 में हेरोइन बरामदगी के एक मामले में अंतरिम जमानत मिलने के बाद से फरार था।
जमानत की अवधि खत्म होने पर भी अदालत में सरेंडर नहीं करने के कारण अक्टूबर 2018 में उसे घोषित अपराधी करार दिया गया था। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। उसने कथित तौर पर अपनी पहचान छिपाने के लिए दरवारा राम नाम का भी इस्तेमाल किया।
पुलिस ने तकनीकी निगरानी और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर 3 नवंबर को उसे पटियाला से पकड़ लिया। पुलिस का दावा है कि दरबारा सिंह करीब तीन दशक से नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल रहा है। उसके खिलाफ पंजाब में आबकारी और एनडीपीएस एक्ट समेत कई मामले दर्ज हैं।
पुलिस के मुताबिक, इनमें से कुछ मामलों में उसे दोषी भी ठहराया जा चुका है। दरबारा सिंह पंजाब का रहने वाला कथित ड्रग तस्कर है। पुलिस , उसका आपराधिक रिकॉर्ड 1987 से शुरू होता है।
उस साल उसके खिलाफ पंजाब में आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस का कहना है कि उसने 1996 में एक ड्रग सप्लायर के लिए कैरियर के तौर पर काम शुरू किया था। कैरियर का काम नशीले पदार्थों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना होता है।
इसके बाद उसका नाम पोस्ता भूसा और हेरोइन की बरामदगी से जुड़े कई मामलों में सामने आया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 1 मई 2017 को स्पेशल सेल थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस केस में दरबारा सिंह और उसके साथी अजय उर्फ संदीप को चार किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था।
बाद में बूटा सिंह नाम के एक अन्य आरोपी को भी पकड़ा गया। मुकदमे के दौरान दरबारा सिंह को अंतरिम जमानत मिल गई। लेकिन जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद वह दोबारा हिरासत में नहीं लौटा।
इसके बाद अक्टूबर 2018 में अदालत ने उसे घोषित अपराधी करार दे दिया। जब कोई आरोपी कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत के सामने पेश नहीं होता और निर्धारित शर्तें पूरी होती हैं, तो अदालत उसे घोषित अपराधी घोषित कर सकती है। यह एक कानूनी स्थिति है, अपने आप में किसी नए अपराध में दोषी ठहराए जाने के बराबर नहीं है।
पुलिस , दरबारा सिंह ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना पैतृक गांव छोड़ दिया था। वह मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के अलग-अलग इलाकों में आता-जाता रहा। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए दरवारा राम नाम का इस्तेमाल किया।
वह पहले पंजाब के फगवाड़ा में रह रहा था। बाद में तकनीकी निगरानी और पुलिस के मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर उसका पता पटियाला में लगाया गया। ।
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