E20 पेट्रोल में 30 फिसदी से ज़्यादा एथनॉल! मिलावट इस देश की व्यावसायिक संस्कृति बन चुकी है। आए दिन हर किसी उत्पाद में कुछ न कुछ मिलावट की बात सामने आती रहती है। पेट्रोल-पंप पर पेट्रोलियम पदार्थों में मिलावट की बात सामने आती रही है।
लेकिन जब सरकार ने पेट्रोल में एथनॉल की मिलावट (E-20 Blending) को अनिवार्य कर दिया तो कुछ पेट्रोल कंपनियों मिलावट के अधिकार को जैसे संस्थागत वैधता मिल गई। पिछले दिनों पेट्रोल में एथनॉल ब्लेंडिंग को लेकर भी प्रोटेस्ट हुई। कई वाहन-मालिकों और चालकों ने वाहनों के पिक-अप, माइलेज और रख-रखाव की चिंता व्यक्त की लेकिन सरकार ने उन चिंताओं को इंधन-आत्मनिर्भरता के नाम पर सिरे से खारिज़ कर दिया।
सरकारी दस्तावेज में यह मिलावट सिर्फ 20 प्रतिशत की है लेकिन आखिरकार ग्राहक जो पेट्रोल ले रहा है उसमें कितनी मिलावट है उसको लेकर पारदर्शिता का अभाव इस पूरी समस्या और केंद्र की सरकार के रुख को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा था। अब दक्षिणी राज्य कर्नाटक से जिस तरह का मामला आ रहा है उससे तेल-कंपनी, पेट्रोल-पंप मालिक और सरकारी अधिकारी सबके हाथों से तोते उड़ गए हैं।
देशभर में पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की नीति (Ethanol Blending Programme) के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक सरकार में खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिज़वान अरशद द्वारा किए गए एक आधिकारिक खुलासे ने वाहन चालकों और ऑटोमोबाइल सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है।
राज्य सरकार द्वारा कराए गए लैब-टेस्ट में सामने आया है कि तय नियमों को धत्ता बताते हुए 'E20 पेट्रोल' में 20 प्रतिशत के बजाय 31 प्रतिशत से अधिक एथनॉल मिलाया जा रहा है। इस खुलासे के बाद उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाले असर और गाड़ियों के इंजन को होने वाले नुकसान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
साथ ही, उपभोक्ताओं की चिंताओं सिरे से खारिज करने वाली केंद्र सरकार के संबंधित विभागों पर भी सवाल उठता है कि क्या ये जांच का विषय नहीं था? क्या उपभोक्ताओं को यह जानने का हक नहीं है कि जिस पेट्रोल के लिए वो पैसे खर्च कर रहा है उसमें कितना प्रतिशत एथनॉल है? ये भी पढें: बैंकिंग सेक्टर में बड़ा भूचाल! बैंक ऑफ बड़ौदा पर किसने किया ₹1.
43 लाख करोड़ का मुकदमा? क्या है पूरा मामला? कर्नाटक सरकार के खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा राज्यभर से विभिन्न पेट्रोल पंपों के 63 सैंपल एकत्र कर उनकी जांच कराई गई थी।
रिपोर्ट , कई प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के ईंधन नमूनों में एथनॉल की मात्रा निर्धारित सीमा से काफी अधिक पाई गई इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL): जांच के दौरान एक सैंपल में एथनॉल का स्तर सबसे ज्यादा 31. 2 प्रतिशत पाया गया। इसके अलावे, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) से लिए गए कुछ नमूनों में यह मात्रा 30.
5 प्रतिशत तक दर्ज की गई। भारत पेट्रोलियम (BPCL), नायरा (Nayara) और शेल (Shell) जैसी कंपनियों के सैंपलों में भी एथनॉल का स्तर क्रमशः 26. 5%, 26.
1% और 25. 5% पाया गया, जो तय मानकों से काफी अधिक है। ।
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