पणजी स्थित गोवा कॉलेज ऑफ होम साइंस के मानव विकास और परिवार अध्ययन विभाग ने "मैरिज रेडिनेस: प्रिपेयरिंग फार हेल्दी एंड लास्टिंग रिलेशनशिप्स" नामक विशेष सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है। गोवा कॉलेज ऑफ होम साइंस दो दिसंबर से शुरू करने जा रहा है 15 दिन का कोर्स जीवनसाथी संग अटूट रिश्ते की डोर थामने का हुनर सीखेंगे युवा गोवा कॉलेज ऑफ होम साइंस दो दिसंबर से शुरू करने जा रहा है 15 दिन का कोर्स हर साल देश भर में टूट जाती हैं हजारों नई शादियां अकेले गोवा में 2022 से 2025 के बीच टूटे तीन हजार घर ।
भारत में विवाह को सात जन्मों का साथ माना जाता है। यहां सामाजिक ताना-बाना इतना मजबूत है कि संबंध-विच्छेद की दर दुनिया में सबसे कम है। किसी को भी हैरत हो सकती है कि तलाक का हिंदी में कोई शब्द ही नहीं है।
पहली बार विवाह-विच्छेद का प्रविधान हिंदू कोड बिल में किया गया। इन सबके बावजूद बढ़ते आधुनिकतावाद से दांपत्य जीवन में अलगाव के मामले चिंता का सबब बन रहे हैं। साल-दर-साल विवाह-विच्छेद की दर बढ़ रही है।
इसी सामाजिक विसंगति पर अंकुश लगाने काे गोवा के एक कालेज ने युवाओं को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाने की अनूठी पहल की है। पणजी स्थित गोवा कॉलेज ऑफ होम साइंस के मानव विकास और परिवार अध्ययन विभाग ने "मैरिज रेडिनेस: प्रिपेयरिंग फार हेल्दी एंड लास्टिंग रिलेशनशिप्स" नामक विशेष सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है।
कॉलेज के प्रिंसिपल महेश पाई , यह 15 दिनी कोर्स दो से 17 दिसंबर, 2026 के बीच आयोजित किया जाएगा। यह कोर्स केवल शादी की रस्मों और समारोह की तैयारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो दिलों के बीच आपसी समझ, अटूट प्रतिबद्धता और वैवाहिक जीवन की वास्तविक जिम्मेदारियों को गहराई से समझने पर केंद्रित है।
यह अहम कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब समाज में रिश्तों की डोर कमजोर पड़ रही है। तलाक के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखने को मिल रही है। ।
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