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ट्रंप को चुनावी झटके से हमारे प्रति अमेरिका का रवैया यकायक बदल नहीं जाएगा: श्याम सरन

DARSH NEWS डेस्क • 07 Nov 2026, 09:13 PM IST
ट्रंप को चुनावी झटके से हमारे प्रति अमेरिका का रवैया यकायक बदल नहीं जाएगा: श्याम सरन

पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन का कहना है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की हार से भारत के प्रति अमेरिका का रवैया तुरंत नहीं बदलेगा। ट्रंप की हार से अमेरिका का भारत प्रति रवैया नहीं बदलेगा। वीजा, इमिग्रेशन, व्यापार नीतियों में तत्काल बदलाव की उम्मीद नहीं।

भारत को धैर्य से अमेरिकी आंतरिक बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। रुमनी घोष। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार की चर्चा भारत में सत्ता के गलियारों से लेकर मोहल्ले के नुक्कड़ तक है।

यह संभवत: पहली बार है, जब अमेरिका के चुनाव पर खास-ओ-आम को समान रूप से चर्चा करते देखा जा रहा है। इस चर्चा के पीछे छिपा 'उत्साह' एक सामान्य मनोविज्ञान हो सकता है, लेकिन क्या यह हमारी-आपकी जिंदगी में कोई बड़ा बदलाव नहीं लाने जा रहा है? भारत के विदेश सचिव रहे श्याम सरन की सलाह है कि अभी हमें इस उत्साह को थामकर रखना चाहिए।

ट्रंप के हारने से हमारे प्रति अमेरिका का रवैया यकायक बदल नहीं जाएगा। न ही वीजा पॉलिसी में तत्काल कोई बदलाव आएगा और न ही फ्री ट्रेड फिर शुरू हो जाएगा। भारत-अमेरिका के बीच न्यूक्लियर डील करवाने वाले और पद्मभूषण से सम्मानित पूर्व भारतीय राजनयिक सरन का मानना है कि हमने अभी तक जिस तरह से खामोशी से स्थिति को संभाला है, वैसे ही आगे बढ़ें और धैर्य के साथ अमेरिका के भीतर आ रहे बदलावों पर नजर रखें।

वर्ष 2006 में विदेश सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु मुद्दों पर प्रधानमंत्री का विशेष दूत नियुक्त किया गया। वह जलवायु परिवर्तन पर विशेष दूत और मुख्य कार भी रहे। वर्ष 2015 तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष भी थे।

आर्थिक और व्यापार-संबंधी मुद्दों पर उनकी विशेषज्ञता है। की समाचार संपादक रुमनी घोष ने सरन से अमेरिका के मध्यावधि चुनाव परिणाम का भारत पर असर विषय पर विस्तार से चर्चा की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश क्या अमेरिका के मध्यावधि चुनाव परिणाम के बाद मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदल जाएगा ?

पूरी तरह से तो नहीं बदल जाएगा, क्योंकि अमेरिका में विदेश नीति पर राष्ट्रपति का नियंत्रण बहुत मजबूत होता है। राष्ट्रपति ट्रंप के पास अभी दो साल का कार्यकाल बाकी है, इसलिए विदेश नीति के मामलों में उनके लिए कार्यकारी निर्णय लेना अब भी संभव है। फिलहाल तत्काल प्रभाव से कोई बदलाव होगा, ऐसा मुझे नहीं लगता है।

तो क्या इस चुनाव परिणाम का कोई असर नहीं होगा? नहीं, ऐसा नहीं है। इतनी बुरी तरह हार हुई है तो असर तो पड़ेगा ही, लेकिन वह अमेरिका की घरेलू नीति से जुड़ा होगा।

जैसे ईरान पर हमले को लेकर कोई निर्णय हो सकता है। आमतौर पर डेमोक्रेट सहित अमेरिका की आम जनता इस हमले के पक्ष में नहीं है। ।

समाचार स्रोत: DARSH NEWS

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