दीवाली के फेस्टिव सीजन में पहनावा किस तरह का होना चाहिए, इस पर बॉलीवुड कलाकार आदिनाथ कोठारे और अंश दुग्गल ने अपनी राय रखी है। आदिनाथ कोठारे और अंश दुग्गल (फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम) दीपेश पांडे, मुंबई: दीवाली पर चमक-धमक और नए लिबास का उत्साह हर किसी के दिल में होता है।
किसी के लिए इस पावन मौके पर नया पारंपरिक कुर्ता-पायजामा पहनना दशकों पुरानी रीत है, तो कोई सहूलियत और सादगी को ही असली स्टाइल स्टेटमेंट मानता है। नामचीन डिजाइनरों के बीच घिरे रहने वाले अभिनेताओं से जानिए कि दीवाली पर उन्हें फैशन का कौन सा रंग भाता है। हालिया प्रदर्शित फिल्म 'नई नवेली' में राज अवस्थी के किरदार में नज़र आए और नितेश तिवारी निर्देशित फिल्म 'रामायणम्' में भरत की भूमिका निभा रहे अभिनेता आदिनाथ कोठारे के लिए यह दीवाली बेहद खास है।
अपने दीवाली फैशन पर वे बताते हैं, "दीवाली की शॉपिंग मैं आज भी खुद ही करता हूं। हमारे यहां सिर्फ ब्रांडेड या डिजाइनर कपड़े पहनने की कोई बंदिश नहीं है। बचपन से परंपरा रही है कि हम हर दीवाली नया कुर्ता-पायजामा खरीदते हैं।
खास बात यह है कि आज भी मेरे दीवाली के कपड़े मेरी मां ही खरीदती हैं, फिर हम उन्हें सिलवाते हैं। हम आज भी उसी दुकान से कपड़े लेते हैं और उसी दर्जी से सिलवाते हैं, जहां बचपन में जाया करते थे। उन्हें हमारी नाप और पसंद का बखूबी अंदाजा है।
इतने सालों में एक आत्मीय रिश्ता बन गया है, जिसे निभाते रहने का अपना ही आनंद है। अब तो उनके यहाँ से त्योहार के कपड़े लेना हमारे परिवार की एक खूबसूरत परंपरा बन चुकी है। दीवाली के मौके पर सिनेमा जगत में आ रहे बदलाव की रोशनी पर आदिनाथ कहते हैं- अब हमारी इंडस्ट्री सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रही, कोई भी कहीं से भी बेहतरीन फिल्म बना सकता है।
भारतीय सिनेमा अपने सुनहरे दौर में है और क्षेत्रीय फिल्में भी वैश्विक पटल पर अपनी चमक बिखेर रही हैं। हालांकि, आज के डिजिटल दौर में बतौर दर्शक हमें यह समझना होगा कि किस खबर या बात पर भरोसा किया जाए और किस पर नहीं। 'डोंट बी शाय' और 'नखरेवाली' फिल्मों के अभिनेता अंश दुग्गल दीवाली पर डिजाइनरों की सलाह मानने के बजाय सहज परिधानों को तवज्जो देते हैं।
वे कहते हैं- मैं अपने पहनावे को लेकर हमेशा आत्मविश्वासी रहा हूं। जो मुझे सहज लगे, वही पहनता हूं। दीवाली पर पारंपरिक भारतीय कपड़े, खासकर साधारण कुर्ता-पायजामा पहनना मुझे बहुत पसंद है।
मेरे लिए फैशन का मतलब वही है जिसे पहनकर अंदर से अच्छा लगे। चूंकि हम कलाकार हैं, तो स्टाइलिस्ट थोड़ी-बहुत मदद कर देते हैं, लेकिन अंतिम फैसला आपकी अपनी पसंद का होना चाहिए। स्टाइलिस्ट तो अब लाइफ में आए हैं, पहले तो दीवाली पर जो मिल जाता था, वही पहन लेते थे—कई बार तो पापा का पुराना कुर्ता ही पहन लिया करता था।
दीवाली का असली मजा अपनों के साथ अच्छा खाने-पीने और वक्त बिताने में है। इंस्टाग्राम पर फैशनेबल तस्वीरें पोस्ट करने का मैं कोई दबाव नहीं लेता; उसका इस्तेमाल सिर्फ अपनी फिल्मों के प्रमोशन तक ही सीमित रखता हूं। ।
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