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'इमरजेंसी लगाना बड़ी भूल थी, इंदिरा गांधी को भी हुआ था इसका अहसास'; अपनी किताब के विमोचन से पहले बोलीं सोनिया गांधी

DARSH NEWS डेस्क • 08 Nov 2026, 08:04 AM IST
'इमरजेंसी लगाना बड़ी भूल थी, इंदिरा गांधी को भी हुआ था इसका अहसास'; अपनी किताब के विमोचन से पहले बोलीं सोनिया गांधी

सोनिया गांधी ने आपातकाल को एक बड़ी गलती माना। इंदिरा गांधी को भी इस फैसले का अहसास था। कांग्रेस की आत्मसंतुष्टि ने भाजपा के उदय में योगदान दिया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 1975 में लगाए गए इमरजेंसी के फैसले को एक गलती करार दिया है। उनका मानना है कि उनकी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी इस बात का अहसास हो गया था।

ब्रिटिश अखबार द गार्जियन , सोनिया गांधी ने यह बातें अपने संस्मरण 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' के विमोचन से पहले कहीं। सोनिया गांधी की किताब में लिखा है कि संजय गांधी को नियंत्रण में रखने से उसके बाद हुए भारी नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता था। उन्होंने खुलासा किया कि आपातकाल लगाने के फैसले पर परिवार बंटा हुआ था।

उनके पति राजीव गांधी इस कदम के सख्त खिलाफ थे, उन्होंने अपनी मां से अगले चुनाव तक इंतजार करने का आग्रह किया था, जबकि उनके छोटे भाई संजय गांधी इसके पक्ष में पूरा जोर लगा रहे थे। उस दौर को याद करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि मुझे हमेशा लगता है कि इंदिरा जी दिल से एक लोकतांत्रिक व्यक्ति थीं।

मैं जानती हूं कि इस बात पर कई लोग हंसेंगे, लेकिन मेरा मानना है कि आपातकाल के पूरे दौर में वह कभी सहज नहीं रहीं। यह फैसला उनके मन पर एक भारी बोझ की तरह था। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी हटने के बाद ही मुझे इसकी वास्तविक गंभीरता का अहसास हुआ।

यह सच है कि लोकतांत्रिक अधिकारों को छीना गया था और बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी हैबियस कॉरपस को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन यह सब संवैधानिक दायरे में किया गया था। बाद में इंदिरा गांधी ने अपनी समझ से स्थिति को सुधारा और आपातकाल की ज्यादतियों के लिए सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त कर माफी भी मांगी।

सोनिया गांधी ने दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस को टीवी पर देखते हुए रोने की घटना भी साझा की। उन्होंने कहा कि उस दिन उन्हें समझ आ गया था कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और उनके साथियों ने जिस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के निर्माण का संघर्ष किया था, उसे बचाए रखने के लिए अब एक लंबी लड़ाई का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि खुद कांग्रेस पार्टी की कमजोरियों और विफलताओं ने काफी हद तक भाजपा और उसकी हिंदुत्व की राजनीति के उभार में योगदान दिया। ।

समाचार स्रोत: DARSH NEWS

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