Panch Pandav Movie Controversy: नेपाली फिल्म इंडस्ट्री में रिलीज से पहले ही एक नई फिल्म को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार) को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली फिल्म 'पांच पांडव' की स्क्रीनिंग पर संकट मंडराने लगा है। फिल्म की प्रोडक्शन टीम से जुड़े एक सदस्य ने दावा किया है कि सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिलने के बावजूद नेपाल के गृह मंत्रालय और सूचना मंत्रालय की ओर से फिल्म की स्क्रीनिंग रोकने का आदेश दिया गया है।
फिल्म 'पांच पांडव' की रिलीज पर क्यों छाए संकट के बादल? इसकी वजह फिल्म में महाभारत की प्रमुख पात्र द्रौपदी के कथित आपत्तिजनक चित्रण को बताया जा रहा है। धार्मिक संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स की शिकायतों के बाद ये मामला तूल पकड़ चुका है।
आखिर फिल्म में ऐसा क्या दिखाया गया, जिस पर इतना विवाद हो रहा है? आइए जानते हैं पूरा मामला। द्रौपदी के चित्रण को लेकर उठे सवाल -फिल्म 'पांच पांडव' को लेकर विवाद की शुरुआत महाभारत की पात्र द्रौपदी के चित्रण से हुई।
फिल्म के निर्देशक बसंत निराउला के मुताबिक लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन की ओर से फिल्म की स्क्रीनिंग रोकने का आदेश दिया गया है। बताया जा रहा है कि नेपाल के बांके जिले के मुख्य जिला अधिकारी दिल कुमार तमांग ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि फिल्म में द्रौपदी के किरदार को ऐसे तरीके से पेश किया गया है, जो धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है। इसके बाद संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के माध्यम से फिल्म निर्माताओं को स्क्रीनिंग पर रोक लगाने के फैसले की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि इस पूरे मामले में सरकारी अधिकारियों की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिल्म को लेकर विवाद की एक बड़ी वजह इसका गाना 'तानियो तानियो' भी है। नेपाली वेबसाइट 24 आवर्स की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म में द्रौपदी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस ईवा गिरी इस गाने में आइटम डांस करती नजर आती हैं।
गाने में द्रौपदी के किरदार को जिस अंदाज में दिखाया गया है, उस पर कुछ धार्मिक संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि महाभारत जैसे पवित्र हिंदू महाकाव्य की अहम महिला किरदार को इस तरह पेश करना धार्मिक मान्यताओं का अपमान है। इस विवाद में नेपाल के विश्व हिंदू परिषद ने भी हस्तक्षेप किया है।
संगठन ने फिल्म की सामग्री की जांच करने की मांग उठाई है। माना जा रहा है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े विवाद को आगे बढ़ने से रोकने के लिए प्रशासन ने फिल्म की स्क्रीनिंग के मामले में दखल दिया है। फिल्म पर उठे विवाद और स्क्रीनिंग रोकने की खबरों के बीच निर्देशक बसंत निराउला ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।
उनका मानना है कि फिल्म को पूरी तरह देखे बिना उसके खिलाफ विरोध शुरू करना निर्माताओं के साथ अन्याय है। ।
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