Bihar to Introduce Mother Tongue Education: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के लिए पढ़ाई का तरीका बदलने जा रहा है। अब पहली और दूसरी कक्षा के छात्र केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि अपनी घर की बोली और क्षेत्रीय भाषा में भी पढ़ सकेंगे। बिहार सरकार शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इस नई व्यवस्था को शुरू करने की तैयारी कर रही है।
इसके तहत राज्य में बोली जाने वाली छह क्षेत्रीय भाषाओं में किताबें तैयार कराई जा रही हैं। सरकार की योजना करीब 40 लाख बच्चों को मुफ्त किताबें देने की है। इस काम पर लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति की जा रही है, जिसमें शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाने पर जोर दिया गया है। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी , बच्चों के लिए छह स्थानीय भाषाओं में किताबें तैयार की जा रही हैं। इनमें भोजपुरी, मगही, सुरजापुरी, बज्जिका, मैथिली और अंगिका शामिल हैं।
इन भाषाओं में पाठ्य पुस्तकें, अतिरिक्त पढ़ने की किताबें और तस्वीरों के जरिए समझाने वाली शिक्षण सामग्री तैयार होगी। इस योजना के तहत करीब 40 लाख विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए 1.
20 करोड़ से अधिक नई किताबों की छपाई शुरू हो गई है। पूरी योजना पर बिहार सरकार लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च करेगी। शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को कठिन व्याकरण पढ़ाने के बजाय उनकी भाषा से जुड़ी कहानियों, कविताओं, लोककथाओं और रोजमर्रा के उदाहरणों के जरिए सिखाया जाएगा।
क्षेत्रीय मेले और स्थानीय संस्कृति से जुड़े विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे। इससे बच्चों को अपनी जानी-पहचानी भाषा में बातें समझने और बाद में औपचारिक हिंदी सीखने में मदद मिलेगी। शिक्षा अधिकारियों के मुताबिक, मातृभाषा में पढ़ाई से बच्चों की समझ, गिनती सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास बेहतर हो सकता है।
इसके लिए शिक्षकों को दो भाषाओं में पढ़ाने की खास ट्रेनिंग देने के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित करने की योजना है। फिलहाल यह व्यवस्था कक्षा 1 और 2 में लागू होगी। इसके बाद सरकार इसे कक्षा 3 से 5 तक बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
इन कक्षाओं के लिए भी स्थानीय भाषाओं में किताबें तैयार कराई जाएंगी। ।
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