सरकार ने भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट और वीजा नियमों में ढील दी विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट-वीजा नियमों में मिली ढील। पाकिस्तानी नागरिकों, शरणार्थियों को भी मिली विशेष छूट। भारत, नेपाल, भूटान के नागरिकों के लिए यात्रा हुई आसान।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सरकार ने देश में रह रहे विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट और वीजा नियमों में ढील दी है। इनमें कुछ पाकिस्तानी नागरिक, अल्पसंख्यक शरणार्थी, श्रीलंकाई तमिल और तिब्बती शामिल हैं।
साथ ही नेपाल, भूटान और भारत के नागरिकों के लिए यात्रा और पहचान से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया गया है। एक अन्य प्रविधान के तहत, ड्यूटी पर देश में आने या यहां से जाने वाले भारतीय नौसेना, थल सेना और वायु सेना के कर्मियों को पासपोर्ट और वीजा की आवश्यकताओं से छूट दी गई है।
यह छूट उनके उन परिवार के सदस्यों को भी मिलती है जो सरकारी परिवहन से उनके साथ यात्रा कर रहे हों। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी संशोधित नियमों , जो पाकिस्तानी नागरिक 31 दिसंबर 2009 को या उससे पहले स्थायी रूप से बसने के इरादे से भारत आए थे, उन्हें पासपोर्ट नवीनीकरण की सामान्य शर्तों से छूट दी गई है।
यह छूट उन लोगों के लिए है, जो पाकिस्तान द्वारा जारी कंप्यूटराइज्ड नेशनल आइडेंटिटी कार्ड न होने के कारण अपने यात्रा दस्तावेजों का नवीनीकरण नहीं करा पा रहे हैं। इस छूट के पात्र होने के लिए, जरूरी है कि उन्होंने पाकिस्तान में रहते हुए शादी न की हो या वहां कोई अचल संपत्ति न खरीदी हो।
साथ ही, पाकिस्तान जाते समय अपने परिवार के उन सदस्यों को पीछे छोड़ दिया हो जो भारतीय नागरिक हैं, और उन्हें यह वचन देना होगा कि वे वापस उस देश में नहीं जाएंगे। उनके खिलाफ पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों की कोई प्रतिकूल रिपोर्ट नहीं होनी चाहिए। छूट के दायरे में आने वाली अन्य श्रेणी में भारतीय मूल के वे लोग हैं, जिन्होंने मलेशिया या सिंगापुर की नागरिकता ले ली थी और उन देशों द्वारा जारी पासपोर्ट पर 31 दिसंबर, 2009 को या उससे पहले भारत लौट आए थे।
ये पासपोर्ट एक्सपायर हो चुके होने चाहिए और इन्हें रिन्यू नहीं कराया गया है, क्योंकि संबंधित देशों की रिन्यूअल शर्तों को ये व्यक्ति पूरा नहीं करते हैं। भारतीय मूल के व्यक्ति का अर्थ एक ऐसा विदेशी नागरिक है (जो पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल और चीन का नागरिक न हो), जिसके पास कभी भारतीय पासपोर्ट रहा हो या वह, अथवा उसके माता-पिता, दादा-दादी/नाना-नानी, या परदादा-परदादी/परनाना-परनानी भारत में पैदा हुए हों और भारत सरकार अधिनियम, 1935 में उल्लिखित क्षेत्रों या बाद में भारत का हिस्सा बने क्षेत्रों में स्थायी रूप से निवासी रहे हों।
शर्त यह है कि इनमें से कोई भी कभी भी ऊपर बताए गए देशों का नागरिक न रहा हो। ।
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