UP Election 2027: अगले साल की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है। सियासी पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है और चुनावी चौसर पर अपने मोहरे बिछाने लगी है। लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कवायद में जुटी भारतीय जनता पार्टी में महामंथन का दौर तेज हो गया है।
आपको बताते चलें कि पिछले हफ्ते केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा के चाणक्य अमित शाह भी लखनऊ में पार्टी नेताओं से मिले थे। उसके बाद से उत्तर प्रदेश भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े की प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत का दौर लगातार जारी है।
पार्टी से जुडे सूत्रों ने बताया कि आक्रामक चुनाव अभियान के लिए मशहूर भाजपा जल्द ही राज्य में अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर सकती है। दरअसल, चुनाव से काफी पहले ही सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव ने सांगठनिक ढांचे को धार देना शुरू कर दिया था। इसी सिलसिले में पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन और यूपी सीएम की अलग से मुलाकात भी हुई थी दिल्ले में।
पिछले चुनावों के अनुभवों और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी इस बार टिकट वितरण और उम्मीदवारों के चयन को लेकर बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। राजनीतिक गलियारों में अभी से इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि बीजेपी इस बार किन चेहरों पर दांव खेलेगी और टिकट बंटवारे का आधार क्या होगा।
भारतीय जनता पार्टी ने आगामी चुनावों के मद्देनजर प्रदेश के सभी संगठनात्मक क्षेत्रों में वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रभारियों की नियुक्तियां कर दी हैं। पार्टी का मुख्य फोकस इस बात पर है कि टिकटों की घोषणा से पहले जमीनी स्तर पर संगठन को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया जाए।
पार्टी ने पिछले चुनावों के परिणामों का बारीकी से विश्लेषण किया है और उन सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जहां पिछले चुनाव में मुकाबला कड़ा था या हार-जीत का अंतर बहुत कम था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी की रणनीति सिर्फ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उससे पहले के उस आंतरिक होमवर्क का हिस्सा है जिसके तहत जिताऊ और सामाजिक रूप से संतुलित चेहरों की तलाश की जाती है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का भी यह मानना है कि टिकट वितरण से पहले बूथ स्तर की मजबूती और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय सबसे अहम है। ये भी पढें: UP Chunav: 'सपा की पिछलग्गु कांग्रेस, घोटालों की पार्टी', Rahul-Akhilesh पर CM योगी क्या बोले? -10 बड़ी बातें उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिगत समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते आए हैं।
वर्ष 2027 के चुनावों के लिए भी बीजेपी इसी फॉर्मूले पर काम कर रही है। पार्टी के भीतर यह मंथन जारी है कि हर क्षेत्र की स्थानीय नब्ज को पहचाना जाए और वहां के प्रभावशाली तथा जनस्वीकार्य चेहरों को आगे बढ़ाया जाए। ।
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