नदियों में जमा गाद की समस्या को विकास के नए अवसर में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। माननीय श्री मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच इस संबंध में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते के तहत नदियों से निकाली गई गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य सड़क निर्माण परियोजनाओं में वैकल्पिक निर्माण सामग्री के रूप में किया जाएगा। इससे अब तक बिहार के लिए चुनौती बनी गाद विकास के काम में उपयोगी साबित हो सकती है। कोसी और बाढ़ के मुद्दे पर काम कर रहे संगठन ‘कोसी नवनिर्माण मंच’ के संस्थापक महेंद्र यादव बताते हैं कि,"बिहार में कोसी नदी में हर साल आने वाली भीषण बाढ़ का एक प्रमुख कारण नदी में बड़ी मात्रा में गाद (सिल्ट) जमा होना है।
कोसी नदी हर साल लगभग 120 मिलियन क्यूबिक मीटर गाद लेकर आती है, जो नदी के तल में जमा हो जाती है। इससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। हर साल लगभग 94 प्रतिशत गाद मानसून के दौरान जमा होती है।
"इस साल आई बाढ़ के कारण गाद का स्तर और बढ़ गया है। पानी भरने और गाद जमा होने से खरीफ की फसलों को नुकसान पहुंचा है। साथ ही, रबी की फसलों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
ऐसे में यदि कोई सरकार इस संवेदनशील समस्या के समाधान की दिशा में काम कर रही है, तो यह सराहनीय है। हालांकि, जरूरी है कि इस योजना को धरातल पर उतारा जाए। " आगे वह बताते है।
बिहार सरकार के आंकड़ों , कोसी नदी बराह क्षेत्र में हर साल लगभग 95 मिलियन क्यूबिक मीटर गाद लेकर आती है। बड़ी मात्रा में गाद जमा होने के कारण ही पिछले 250 वर्षों में कोसी नदी ने पश्चिम की ओर लगभग 112 किलोमीटर तक अपना रास्ता बदल लिया है। वहीं, पूर्व अभियंता अमोद कुमार झा का कहना है कि बिहार को बाढ़ से बचाने के लिए सरकार को कई स्तरों पर काम करना होगा।
इसमें गाद की समस्या सबसे महत्वपूर्ण है। नदी के संकरे हिस्सों, मुहानों और संगम स्थलों से गाद हटाने पर पानी का प्रवाह तेज हो सकता है। इससे जलस्तर अचानक बढ़ने की स्थिति में कुछ स्थानों पर तटबंधों पर पानी का सीधा दबाव भी कम हो सकता है।
नदियां किसी भी प्रदेश की जीवन रेखा होती हैं, लेकिन बिहार में दशकों से नदियों में जमा गाद एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इसके कारण नदियों की जलधारण क्षमता और पानी का प्रवाह प्रभावित होता है। इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान तलाशने की दिशा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रयासों से बिहार देश का पहला राज्य बना है, जिसने अपनी अलग गाद प्रबंधन नीति तैयार की है।
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