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Israel New PM Gadi Eisenkot: गदी एजेंकोट इजरायल के नए पीम, नेतन्याहू युग खत्म! भारत के साथ संबंधों पर क्या असर

DARSH NEWS डेस्क • 08 Nov 2026, 06:25 PM IST
Israel New PM Gadi Eisenkot: गदी एजेंकोट इजरायल के नए पीम, नेतन्याहू युग खत्म! भारत के साथ संबंधों पर क्या असर

हालिया चुनावों के बाद इजरायल की राजनीति एक ऐतिहासिक मोड़ लेती हुई दिख रही है। चुनाव-नतीजों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलने के बाद इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने निवर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सबसे कड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सेना प्रमुख गदी एजेंकोड को नई सरकार के गठन का औपचारिक न्योता और 28 दिनों के अंदर विश्वास मत हासिल करने का आदेश दे दिया है।

यह फैसला लंबे समय से सत्ता पर काबिज बेंजामिन नेतन्याहू के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। चुनाव परिणाम के दो हफ्ते बाद तक इजराय के राष्ट्रपति भवन में इस बात पर मैराथन मंथन होती रही कि कौन होगा अगला प्रधानमंत्री। बेंजामिन समर्थकों को उम्मीद थी कि अनुभवी राजनीतिक खिलाडी बेंजामिन नेतन्याहू पिछले चुनाव की तरह इस बार भी कोई जादू करेंगे लेकिन मैराथन बैठकों और राजनीतिक दलों के साथ मंत्रणा के बाद बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए नेतन्याहू के धुर-विरोधी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है।

राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग द्वारा दी गई जानकारी , केसेट (इजरायली संसद) में प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न राजनीतिक दलों और गुटों के कुल 67 सांसदों ने गदी एजेंकोड के पक्ष में अपनी सिफारिश दी है। इसके मुकाबले, कार्यवाहक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन में केवल 46 सांसद खड़े नजर आए, जबकि 7 सांसदों ने किसी का भी समर्थन करने से परहेज किया।

यशा पार्टी के नेता और आईडीएफ (IDF) के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके 66 वर्षीय गदी एजेंकोड को अब कानून के मुताबिक सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय मिला है। यदि जरूरत पड़ी तो राष्ट्रपति इस अवधि में 14 दिन का अतिरिक्त विस्तार भी दे सकते हैं। गदी एजेंकोड ने साल 2015 से 2019 तक इजरायली रक्षा बलों (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में देश की सैन्य कमान संभाली थी।

उन्हें एक सख्त और रणनीतिक रूप से स्पष्टवादी सैन्य कमांडर के रूप में जाना जाता है। इजरायल के मौजूदा राजनीतिक पटल पर वे नेतन्याहू के दक्षिणपंथी और धुर-धार्मिक गठजोड़ के एक मजबूत वैचारिक विकल्प के रूप में उभरे हैं। एजेंकोड ने अपने चुनावी अभियानों और बयानों में देश को एकजुट करने, वेस्ट बैंक में चरमपंथी बस्तियों की हिंसक गतिविधियों पर नकेल कसने और आंतरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण को कम करने पर जोर दिया है।

हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर उनकी छवि एक 'हॉक' (कड़े तेवर वाले नेता) की रही है-वे हमास के सफाए और आतंकवाद के खिलाफ आक्रामक रुख के पक्षधर रहे हैं, हालांकि वे फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन के पारंपरिक विरोधियों में गिने जाते हैं। सरकार बनाने का न्योता भले मिल गया हो लेकिन गदी एजेंकोड के लिए इजरायल में सत्ता का समीकरण एक अलग ही चुनौती रहेगी।

61 सीटों के जादुई आंकड़े तक पहुंचना और एक स्थिर सरकार चलाना लोहे के चने चबाने जैसा होगा। अभी कुछ सांसदों का झुकाव बेशक एजेंकोड के पक्ष में है लेकिन जैसे-जैसे विधाई काम-काज आगे बढेंगे, नीतिगत फैसले की बारी आएगी तो मतभेद भी बढ सकते हैं। ।

समाचार स्रोत: DARSH NEWS

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