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UGC Equity Rules: क्या फिर बदले जाएंगे इक्विटी नियम? सुप्रीम कोर्ट की सलाह क्या? 5 पॉइंट में समझिए

DARSH NEWS डेस्क • 06 Nov 2026, 01:42 PM IST
UGC Equity Rules: क्या फिर बदले जाएंगे इक्विटी नियम? सुप्रीम कोर्ट की सलाह क्या? 5 पॉइंट में समझिए

UGC Equity Regulations 2026: विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए UGC के नए इक्विटी नियमों पर एक बार फिर मंथन शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह इन नियमों की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने पर विचार कर रही है।

अदालत ने कहा कि नियमों में बदलाव करते समय सभी वर्गों के छात्रों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि किसी को भेदभाव या अनुचित उत्पीड़न का डर न रहे। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। क्या है पूरा मामला?

5 पॉइंट में समझिए। UGC के इक्विटी नियमों को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेषज्ञ समिति बनाने पर विचार करने की जानकारी दी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संशोधित नियम ऐसे होने चाहिए, जिनसे किसी भी वर्ग के छात्र के मन में असुरक्षा की भावना पैदा न हो।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नियमों में संशोधन करते समय युवा पीढ़ी और सभी वर्गों के छात्रों के व्यापक हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। अदालत की चिंता यह सुनिश्चित करने को लेकर है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए नियम किसी छात्र के साथ अन्याय या अनुचित व्यवहार का कारण न बनें।

कोर्ट ने केंद्र को सुझाव दिए हैं। अब सरकार इन सुझावों पर क्या कदम उठाती है, इस पर नजर रहेगी। UGC ने 13 जनवरी 2026 को 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026' अधिसूचित किए थे।

इनका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना और भेदभाव रोकना है। विवाद मुख्य रूप से रेगुलेशन 3(1)(c) में जातिगत भेदभाव की परिभाषा को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के खिलाफ होने वाले जातिगत भेदभाव का उल्लेख किया गया है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों को भी ऐसी ही शिकायतों के खिलाफ समान सुरक्षा मिलनी चाहिए।

विरोध करने वाले पक्षों ने यह आशंका भी जताई है कि स्पष्ट और संतुलित प्रावधानों के अभाव में नियमों का दुरुपयोग हो सकता है। हालांकि, ये याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां हैं, न कि अदालत की ओर से सभी आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष। UGC के नए इक्विटी नियमों को चुनौती दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को इन पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

अदालत ने प्रथम दृष्टया कुछ प्रावधानों की स्पष्टता और उनके संभावित प्रभावों पर चिंता जताई थी। अदालत के सामने यह सवाल भी था कि भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए नियम कहीं शिक्षण संस्थानों में छात्रों के बीच विभाजन की आशंका तो नहीं बढ़ाएंगे। यह रोक अंतरिम व्यवस्था का हिस्सा है।

इसे नियमों की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। ।

समाचार स्रोत: DARSH NEWS

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