कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार को केरल के कोच्चि में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में अभिनेता प्रकाश राज और अभिजीत दीपके समेत कई चर्चित चेहरे शामिल हुए। सीजेपी ने इस कार्यक्रम को 'जंतर-मंतर @ कोच्चि' नाम दिया है।
प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने केरल सरकार के एक प्रशासनिक फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य में चुनाव से जुड़े बड़े पदों पर रहे अधिकारियों को सीधे मुख्यमंत्री का सेक्रेटरी नहीं बनाया जाना चाहिए। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोट चोरी के सवाल पर दीपके ने दावा किया कि पूरे देश में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
इससे पहले सीजेपी दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर चुकी है, हालांकि वहां उसे खास सफलता नहीं मिली थी। पूर्व चुनाव अधिकारी की नियुक्ति पर उठाए सवाल कोच्चि पहुंचे अभिजीत दीपके से केरल सरकार के उस फैसले के बारे में पूछा गया, जिसमें पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) डॉ.
रतन यू. केलकर को मुख्यमंत्री वी. डी.
सतीशन का सेक्रेटरी बनाया गया है। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा किसी भी राज्य में नहीं होना चाहिए। दीपके ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भाजपा की जीत के बाद चुनाव आयुक्त को मुख्यमंत्री का मुख्य सचिव बनाया गया था।
उनके मुताबिक, चुनाव व्यवस्था की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐसी नियुक्तियों को सही नहीं माना जा सकता। दरअसल, केरल की कांग्रेस सरकार ने इसी साल मई में 2003 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. रतन यू.
केलकर को मुख्यमंत्री का सेक्रेटरी नियुक्त किया था। इस फैसले पर सीपीआईएम, सीपीआई और भाजपा ने आपत्ति जताई थी। विपक्षी दलों ने नियुक्ति के समय और चुनावी निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए थे।
खास बात यह है कि पश्चिम बंगाल में इसी तरह की नियुक्ति पर कांग्रेस भी सवाल उठा चुकी है। SIR में वोट डिलीट होने पर क्या बोले दीपके? प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके से पूछा गया कि क्या एसआईआर प्रक्रिया में केरल में भी वोट चोरी हुई है।
इस पर उन्होंने कहा कि पूरे देश में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उन, ऐसा कोई राज्य नहीं है जहां वोट डिलीट नहीं किए जा रहे हों। गौरतलब है कि केरल विधानसभा चुनाव में इस साल कांग्रेस की जीत हुई थी।
भाजपा इसी मुद्दे पर कांग्रेस को घेरती रही है। उसका सवाल है कि जब कांग्रेस भाजपा की जीत पर चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाती है, तो केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में अपनी जीत के बाद वही सवाल क्यों नहीं उठाती। ।
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