Delhi AQI: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सिर्फ 96 घंटे में राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 124 से बढ़कर 464 तक पहुंच गया। 30 अक्टूबर को बारिश के बाद दिल्ली की हवा में कुछ सुधार हुआ था लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिकी।
नवंबर की शुरुआत होते ही प्रदूषण तेजी से बढ़ने लगा। 3 नवंबर को सुबह 11:31 बजे दिल्ली का AQI 464 दर्ज किया गया। वहीं कई इलाकों में यह 400 के पार पहुंच गया।
बिगड़ती हवा को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में सख्ती बढ़ा दी है। 5 से 20 नवंबर तक कई तरह के निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक रहेगी। सरकारी और निजी दफ्तरों में भी कम से कम 50 फीसदी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा।
आखिर चार दिनों में दिल्ली की हवा इतनी खराब कैसे हो गई और अब लोगों को किन पाबंदियों का सामना करना पड़ेगा? आइए समझते हैं। 96 घंटे में कैसे बिगड़ी दिल्ली की हवा?
अक्टूबर के आखिरी दिनों में बारिश और तेज हवाओं के चलते दिल्ली को प्रदूषण से थोड़ी राहत मिली थी। 30 अक्टूबर को राजधानी का औसत AQI 124 था। उस दिन अलग-अलग इलाकों में सबसे कम स्तर 45 और सबसे ज्यादा 280 दर्ज किया गया।
इसके बाद हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती गई। 31 अक्टूबर को औसत AQI बढ़कर 256 हो गया। 1 नवंबर को यह 369 और 2 नवंबर को 393 तक पहुंच गया।
2 नवंबर को कुछ इलाकों में AQI 499 तक दर्ज किया गया, यानी 500 के अधिकतम स्तर से सिर्फ एक अंक कम। 3 नवंबर की आधी रात 12:01 बजे AQI 432 था। सुबह 11:31 बजे यह बढ़कर 464 हो गया।
यानी बारिश से मिली राहत के बाद प्रदूषण ने बेहद तेजी से वापसी की। Delhi-NCR Pollution: दिवाली पर पटाखों की छूट से 6 दिन पहले दिल्ली की हवा हुई जहरीली! AQI 325, GRAP-2 लागू दिल्ली के इन इलाकों में रेड अलर्ट: AQI 400 के पार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को राजधानी के दर्जनों इलाकों में हवा बेहद खतरनाक श्रेणी में रही 30 अक्टूबर को बारिश और तेज हवाओं ने प्रदूषण कम करने में मदद की थी।
बारिश के साथ हवा में मौजूद कुछ प्रदूषक नीचे बैठ गए और तेज हवाओं ने धुएं को फैलाने में मदद की। यह राहत पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवात अर्नब से जुड़े मौसम सिस्टम के असर से मिली थी। लेकिन मौसम सूखा होते ही हालात बदलने लगे।
गाड़ियों का धुआं, फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषण, निर्माण कार्यों की धूल, सड़कों की मिट्टी और कचरा जलाने से निकलने वाला धुआं फिर हवा में जमा होने लगा। इसके पीछे एक बड़ी वजह कमजोर हवाएं भी हैं। जब हवा की रफ्तार कम होती है और वातावरण में हवा के ऊपर-नीचे मिलने की प्रक्रिया कमजोर पड़ती है, तो प्रदूषण जमीन के पास ही फंसा रहता है।
रात और सुबह के वक्त यह स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है। ।
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