US Midterm Poll 2026: दुनिया की सबसे पुरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था माने जाने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में राजनीतिक ताकत का संतुलन तय करने वाला 'मध्यावधि चुनाव' वेरमोंट स्टेट में पहला वोट डाले जाने के साथ शुरू हो चुका है। न्यू जर्सी, वर्जिनिया, केंटुकी और इंडियाना स्टेट्स में मतदान थोडा देर से शुरु हुआ।
इसके साथ ही अमेरिकी मतदाता देश की संसद - सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के नए प्रतिनिधियों को चुनने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। US के डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस ने बताया कि इन चुनावों की निगरानी के लिए सभी 50 राज्यों में रिकार्ड 1000 मॉनिटर्स लगाए गए हैं।
यह चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों के एजेंडे की दिशा तय करेगा। Virtual Referendum - ट्रंप के लिए क्यों साख का सवाल है यह चुनाव? यह मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में अमेरिकी जनता का एक बड़ा वर्ग बढ़ती महंगाई और ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष के कारण असंतुष्ट नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि रिपब्लिकन पार्टी संसद के दोनों सदनों में अपना नियंत्रण खो देती है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए आगामी नीतियों को लागू करना बेहद कठिन हो जाएगा।
हाल ही में फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डिसाइंटिस ने भी चेतावनी दी है कि ईरान संघर्ष की वजह से ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं, जिसका सीधा असर कामकाजी वर्ग के मतदाताओं पर पड़ रहा है। ऐसे में महंगाई और युद्ध जैसे मुद्दे इस चुनाव में सबसे बड़े गेमचेंजर साबित हो रहे हैं। उधर मिडटर्म पोल शुरु होने से एकदम पहले ईरान पर हमला और राष्ट्रपति ट्रंप को उसे छोटा हमला - युद्ध नहीं कहकर डिफेंड करना भी इस बात का संकेतक है कि ट्रंप का आत्मविश्वास इस वक्त कमजोर है।
इस चुनाव में अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर मुकाबला है। डेमोक्रेटिक पार्टी सीनेट और हाउस में रिपब्लिकन पकड़ को कमजोर करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। डेमोक्रेट्स ने उन राज्यों में भी सेंध लगाने की कोशिश की है, जहां पिछले राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को भारी बढ़त मिली थी।
इसके साथ ही, लातीनी (Latino) मतदाता इस बार एक बड़े स्विंग ब्लॉक के रूप में उभरे हैं। विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों , अर्थव्यवस्था और राष्ट्रपति ट्रंप के कामकाज के तरीके को लेकर इस समुदाय में असंतोष देखा गया है, जो चुनाव परिणाम को किसी भी ओर मोड़ सकता है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे केवल अमेरिका की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं हैं।
अमेरिकी संसद की संरचना यह तय करती है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों, रक्षा बजट और रणनीतिक साझेदारियों (विशेषकर भारत-अमेरिका संबंधों और इंडो-पैसिफिक नीति) को किस तरह की विधाई स्वीकृति मिलेगी। ईरान संघर्ष और वैश्विक कूटनीति पर अमेरिकी कांग्रेस का कड़ा रुख दुनिया के बाकी देशों को भी सीधे प्रभावित करता है।
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