US Midterm Election 2026: अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव के तहत जॉर्जिया, साउथ कैरोलाइना और वर्मोंट समेत 6 राज्यों में मतदान खत्म हो चुका है। वोटिंग समाप्त होने के बाद अब मतगणना शुरू हो गई है। इन चुनावों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ-साथ उनकी रिपब्लिकन पार्टी की भी नजर है।
वजह साफ है। अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बहुमत है। अगर नतीजों में यह स्थिति बदलती है तो ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान नहीं रहेगा।
इस चुनाव में अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर वोट पड़ रहे हैं। सीनेट की 35 सीटों पर भी मुकाबला है। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर और स्थानीय पदों के लिए भी चुनाव हो रहे हैं।
मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच यानी दो साल बाद होते हैं। इनका नतीजा अगले दो साल के लिए संसद में सत्ता का संतुलन तय करता है। मतदान से पहले ही 5.
76 करोड़ से ज्यादा अमेरिकी नागरिक 'अर्ली वोटिंग' के तहत अपना वोट डाल चुके हैं, जिसने 2022 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। फिलहाल अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा है। लेकिन सत्ता बचाने के लिए उन्हें कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है फिर शुरू हुई अमेरिका-ईरान जंग?
US ने केशम द्वीप पर बरसाईं मिसाइलें, समझौते की बात कर ट्रंप ने बदला रुख! Midterm Elections 2026: ट्रंप के लिए क्यों अहम है यह चुनाव? अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी की मौजूदा स्थिति अलग-अलग है। सीनेट में उसके पास 53 सीटें हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 45 और दो निर्दलीय सदस्य हैं, जो डेमोक्रेट्स के साथ काम करते हैं। वहीं हाउस में रिपब्लिकन पार्टी के पास 218 और डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं। एक सीट निर्दलीय सदस्य के पास है और दो सीटें खाली हैं।
सीनेट में बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन चाहिए। अगर दोनों पक्षों के पास 50-50 सीटें होती हैं, तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट दे सकते हैं। हाउस में बहुमत का आंकड़ा 218 है।
यानी यहां कुछ सीटों का अंतर भी सत्ता का समीकरण बदल सकता है। इजराइल में नेतन्याहू की कुर्सी फंसी,अमेरिका में ट्रंप का इम्तिहान! क्या चुनाव बाद ईरान पर फिर बरसेंगे बम? अगर सीनेट में बहुमत खोया तो ट्रंप को क्या होगा बड़ा नुकसान?
रिपब्लिकन पार्टी अगर किसी एक सदन में भी बहुमत गंवाती है, तो ट्रंप के लिए कानून पास कराना मुश्किल हो सकता है। हाउस में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने पर सरकार के विधेयकों को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। बजट और सरकारी खर्च को लेकर भी टकराव बढ़ सकता है।
सीनेट में बहुमत खोने का असर नियुक्तियों पर पड़ सकता है। राष्ट्रपति के कई बड़े प्रशासनिक पदों और संघीय जजों की नियुक्तियों पर सीनेट की मंजूरी जरूरी होती है। सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति भी इसी प्रक्रिया से गुजरती है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय संधियों को मंजूरी दिलाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, हर विदेशी समझौते के लिए सीनेट की मंजूरी जरूरी नहीं होती। ।
पाठक प्रतिक्रियाएं